रंजन सिन्हा/न्यूज11 भारत
नवादा/डेस्क: नवादा विधि महाविद्यालय में विधि शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल के अंतर्गत दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विधि विशेषज्ञ सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया. सेमिनार का विषय “Legal Landscape of Artificial Intelligence in the Global South” रहा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कानूनी चुनौतियों, संभावनाओं और भविष्य के दृष्टिकोण पर गहन विमर्श किया गया.
यह सेमिनार न केवल नवादा जिले बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय बना, क्योंकि इसमें देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित विधि प्रमुखों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के विधि विशेषज्ञों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी सहभागिता सुनिश्चित की. इस सेमिनार का उद्देश्य विधि के छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की समकालीन विधिक चुनौतियों से अवगत कराना तथा उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण से सशक्त बनाना रहा.सेमिनार के उद्घाटन सत्र में जबलपुर विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ प्रोफेसर मनोज कुमार सिन्हा, पटना विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति (वाइस चांसलर) प्रोफेसर भैनी भूषण, पटना विश्वविद्यालय के ही वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ समीर जावेद, रुचि सिंह एवं भूषण सहित अनेक प्रख्यात शिक्षाविदों ने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से सहभागिता की. सभी सम्मानित अतिथियों के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया. दीप प्रज्वलन के साथ ही ज्ञान, न्याय और विधि के मूल आदर्शों का संदेश पूरे सभागार में प्रसारित हुआ.
इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की अध्यक्षता नवादा विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी.एन. मिश्रा के द्वारा की गई. अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह सेमिनार नवादा विधि महाविद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि देश-विदेश के प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ एक मंच पर जुड़कर छात्रों का मार्गदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज नवादा विधि महाविद्यालय की पहचान केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे केंद्र के रूप में बन रही है, जहां से निकलकर छात्र राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकते हैं.
इस अवसर पर डॉ. डी.एन. मिश्रा के द्वारा सभी अतिथियों का अंग वस्त्र, विष्णु चरण चिन्ह एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया. उन्होंने स्वागत भाषण में कहा कि नवादा विधि महाविद्यालय विधि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, अनुशासन और नवाचार के लिए जाना जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि महाविद्यालय का निरंतर प्रयास रहा है कि छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी सक्षम बनाया जाए.
उन्होंने सभी विधि विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट प्रतिभा के धनी हैं और विधि शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सतत प्रयासरत हैं.सेमिनार को संबोधित करते हुए जबलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मनोज कुमार सिन्हा ने कहा कि वर्तमान समय में विधि शिक्षा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है. अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार, संवैधानिक मूल्य, साइबर अपराध और पर्यावरण कानून जैसे विषय आज के विधि छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने नवादा विधि महाविद्यालय द्वारा इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इससे छात्रों को विश्व स्तर की विधिक चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है.
पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भैनी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल अधिवक्ता या न्यायाधीश तैयार करना नहीं है, बल्कि समाज को न्यायप्रिय, संवेदनशील और संविधान के प्रति जागरूक नागरिक देना है. उन्होंने कहा कि नवादा विधि महाविद्यालय जिस प्रकार विधि विशेषज्ञों और छात्रों के बीच संवाद स्थापित कर रहा है, वह प्रशंसनीय है. इससे छात्रों में तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और व्यावहारिक समझ का विकास होता है.अन्य विधि विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि नवादा विधि महाविद्यालय की प्रतिभा केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के छात्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं. उन्होंने प्राचार्य डॉ. डी.एन. मिश्रा की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा कि वे विधि विशेषज्ञों और लॉ के छात्रों के बीच सतत संवाद स्थापित करते हैं, जिससे शिक्षा का स्तर और अधिक सुदृढ़ होता है.
इस दो दिवसीय सेमिनार की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि मास्को (रूस) से प्रोफेसर रयबोवा एलेना मॉस्को यूनिवर्सिटी, प्रोफेसर विक्टर मचेहीन मॉस्को यूनिवर्सिटी एवं क्रिस्टन दादोमो यूरोपियन यूनियन,वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सेमिनार से जुड़े. उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से एआई (Artificial Intelligence), अंतरराष्ट्रीय विधि व्यवस्था, वैश्विक न्याय प्रणाली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर विशेष चर्चा की. मास्को से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में एआई और तकनीक का प्रभाव विधि के क्षेत्र में और अधिक बढ़ेगा, ऐसे में छात्रों को तकनीक-संगत विधिक ज्ञान से लैस होना आवश्यक है.
सेमिनार के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें संवैधानिक कानून, अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार, साइबर लॉ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समकालीन विधिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय विधि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया. विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी कि वे अध्ययन के साथ-साथ शोध, संवाद और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दें.कार्यक्रम के समापन सत्र में सभी अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार विधि शिक्षा को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होते हैं. उन्होंने आशा व्यक्त की कि नवादा विधि महाविद्यालय भविष्य में भी इस तरह के शैक्षणिक एवं बौद्धिक आयोजनों के माध्यम से विधि शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा.इस प्रकार, नवादा विधि महाविद्यालय में आयोजित यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विधि विशेषज्ञ सेमिनार ज्ञान, संवाद और वैश्विक दृष्टिकोण का सशक्त मंच बनकर उभरा, जिसने विधि के छात्रों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
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