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बिहार/डेस्क: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्णिया दौरे से पूर्व कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि रैलियों और भाषणों से पहले प्रधानमंत्री को 2-3 किलोमीटर के दायरे में मौजूद जर्जर सड़क, शिक्षकविहीन स्कूल, खराब स्वास्थ्य केंद्र और महिलाओं व युवाओं की जनसमस्याओं का निरीक्षण करना चाहिए.
तेजस्वी ने कहा कि पूर्णिया मेडिकल कॉलेज की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है, जिसे पीएम मोदी ने कल ही देखा होगा. उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री की एक रैली से बिहार जैसे गरीब राज्य पर 100 करोड़ का भारी वित्तीय बोझ पड़ता हैं. इस राशि से स्कूलों की चारदीवारी, खेल के मैदान और लड़कियों के लिए अलग शौचालय बन सकते थे, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मानव संसाधन और दवाइयों की व्यवस्था की जा सकती थी. नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि रैलियों के कारण शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर कंडक्टर बनना पड़ता है और सरकारी कर्मचारियों, आशा-ममता कार्यकर्ताओं, शिक्षा मित्रों और आंगनवाड़ी सहायिकाओं पर भीड़ जुटाने का दबाव और तनाव बढ़ जाता हैं.
तेजस्वी ने याद दिलाया कि 11.5 साल पहले पीएम मोदी ने पूर्णिया से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था. उन्होंने पूछा, "क्या उस वादे का कुछ हुआ? क्या अब भी चुनाव के समय बिहारवासियों को झूठ और जुमले ही बेचे जा रहे हैं?" उन्होंने चेतावनी दी कि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार की विफलताओं को छुपाने के लिए "जंगलराज" जैसे शब्दों का प्रचार किया जा रहा है, लेकिन बिहार और इसके लोग अब इस बनावटीपन को भलीभांति पहचान चुके हैं. तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि बिहार में अब झूठ नहीं चलेगा.
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