न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: अपनी पहली ही राजनीतिक पारी में सत्ता तक पहुंचे मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय को तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को फ्लोर टेस्ट देना है. लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले ही उन्हें झटक लग गया है. मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की ही पार्टी (टीवीके) के एक विधायक को विधानसभा फ्लोर टेस्ट की कार्रवाई में भाग लेने से रोक दिया है.
हाईकोर्ट ने यह आदेश एक वोट से जीत हासिल करने वाले टीवीके विधायक के लिए जारी किया है. बता दें कि टीवीके विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति ने डीएमके नेता नेता के आर पेरियाकरुप्पन को एक वोट से हराया था. इसके बाद आर पेरियाकरुप्पन इस संकीर्ण जीत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है जिस पर शीर्ष अदालत आज ही सुनवाई करने वाला है.
DMK उम्मीदवार और राज्य में पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन ने तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र के नतीजे से नाखुश होकर पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उन्होंने दावा किया था कि 4 मई को वोट गिनती के दौरान एक पोस्टल बैलेट की गिनती नहीं हुई है. गिनती के दौरान वह पोस्टल बैलेट अन्य विधानसभा क्षेत्र में चला गया था. इसी कारण उन्हें हार मिली है. इसके साथ ही डीएमके नेता ने वोट गिनती में भी अनियमितता का आरोप लगाया है. बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
फ्लोर टेस्ट में टीवीके के पक्ष में क्या है समीकरण
234 विधानसभा वाले तमिलनाडु चुनाव में से 108 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है. बहुमत के लिए उन्हें 118 चाहिए. चूंकि विजय दो क्षेत्रों से चुनाव लड़े थे, और एक सीट को उन्होंने छोड़ दिया है.इसलिए उनकी पार्टी के कुल 107 विधायक हैं. टीवीके के समर्थन में कांग्रेस-5, VCK, IUML, CPI, CPM को मिलाकर 120 विधायक होने का दावा किया जा रहा है. टीवीके के लिए एक बड़ी राहत की बात यह है कि AIADMK का एक धड़ा पार्टी से विद्रोह कर उसके सपोर्ट की बात कह रहा है. जब फ्लोर टेस्ट होगा तब यह सिद्ध हो जाएगा कि किस दल ने टीवीके को सपोर्ट किया है. वैसे मद्रास हाई कोर्ट ने एक विधायक के वोट नहीं देने पर जो रोक लगाई है, ऐसा नहीं लगता कि इसका फ्लोर टेस्ट और विश्वासमत हासिल करने पर कोई असर डाल पाएगा.
यह भी पढ़ें: पीएम नरेंद्र मोदी ने आधा किया अपना काफिला, इलेक्ट्रिक वाहनों का शुरू किया इस्तेमाल