नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़

न भूकंप, न बर्फ की झील फटा... इस वजह से नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़, असली वजह का खुलासा

भारत के लिए भी चेतावनी

By : Ark Sahuliyar
न भूकंप, न बर्फ की झील फटा... इस वजह से नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़, असली वजह का खुलासा

न्यूज11 भारत 
काठमांडू/डेस्क:
नेपाल में अचानक आई बाढ़ को लेकर शुरुआती घंटों में कई तरह की अटकलें लगाई गईं. कहीं इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया तो कहीं ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की आशंका जताई गई. कुछ रिपोर्टों में चीन के तिब्बती क्षेत्र में हुई संभावित गतिविधियों को भी घटना से जोड़ने की कोशिश हुई. लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद सामने आई तस्वीर इन कयासों से अलग है. जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे घाटी में जा गिरा. इसके साथ बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे आया, जिसने नदी के प्रवाह को प्रभावित किया और देखते ही देखते खतरनाक बाढ़ का रूप ले लिया.

भूकंप जैसा महसूस हुआ कंपन, लेकिन वजह ग्लेशियर
बाढ़ के दौरान जमीन में कंपन दर्ज होने के कारण शुरुआत में भूकंप की आशंका मजबूत हुई थी. बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इस रिकॉर्ड का दोबारा अध्ययन किया. विश्लेषण में किसी भूकंप की पुष्टि नहीं हुई. इसके बजाय वैज्ञानिकों ने पाया कि दर्ज किया गया कंपन ग्लेशियर के टूटने और उसके साथ भारी मलबे के नीचे आने से पैदा हुआ था. यानी जिस कंपन को पहले संभावित भूकंप माना जा रहा था, वह वास्तव में ग्लेशियर के अचानक टूटने की प्रक्रिया का हिस्सा था.

करीब एक किलोमीटर नीचे पहुंचा बर्फ और मलबा
सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर से घाटी की तरफ एक नया निशान दिखाई दिया है. यह संकेत देता है कि ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा करीब एक किलोमीटर नीचे तक खिसक गया. इस घटना के दौरान बर्फ के साथ पत्थर, मिट्टी और अन्य मलबा भी तेजी से नीचे पहुंचा. भारी मात्रा में सामग्री नदी तक पहुंचने से उसका सामान्य प्रवाह प्रभावित हुआ और पानी का दबाव निचले इलाकों की ओर बढ़ गया. विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियर के भीतर पहुंचने वाला पिघला पानी भी इसकी स्थिरता को प्रभावित कर सकता है. बर्फ और जमीन के बीच पानी जमा होने पर पकड़ कमजोर पड़ती है और ग्लेशियर का कोई हिस्सा अचानक खिसकने या टूटने का खतरा बढ़ जाता है.

कुछ ही समय में कई गुना चौड़ी हो गई नदी
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा प्रभावित इलाकों में नदी के अचानक बढ़े फैलाव से लगाया जा सकता है. स्याफ्रुबेसी में नदी किनारे के इलाकों में भारी मलबा जमा हो गया. बेट्रावती बाजार में नदी का फैलाव करीब 90 मीटर से बढ़कर लगभग 490 मीटर तक पहुंच गया. वहीं बिदुर में भी नदी की चौड़ाई करीब 100 मीटर से बढ़कर 549 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई. इस बदलाव ने दिखा दिया कि ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियर से जुड़ी कोई घटना कितनी तेजी से नदी घाटियों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.

ग्लेशियर टूटा क्यों? वैज्ञानिकों की नजर कई कारणों पर
अब वैज्ञानिकों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि लिरुंग ग्लेशियर का हिस्सा अचानक अस्थिर क्यों हुआ. इसके संभावित कारणों में बढ़ता तापमान, बर्फ का पिघलना और ग्लेशियर के अंदर पानी का पहुंचना शामिल हैं. हालांकि, इस घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताना अभी जल्दबाजी होगी. फिर भी हिमालय में बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के तेजी से बदलते स्वरूप ने भविष्य के जोखिम को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है.

क्या दोबारा आ सकती है ऐसी बाढ़?
घटना का खतरा केवल बीती बाढ़ तक सीमित नहीं माना जा रहा है. नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्सों में जमा मलबा कई जगह पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर सकता है. यदि ऐसे अवरोध अचानक टूटते हैं तो निचले क्षेत्रों में एक बार फिर तेज जलप्रवाह पहुंचने की आशंका पैदा हो सकती है. इसी कारण विशेषज्ञ ऊपरी पहाड़ी इलाकों में बने अस्थायी जल-अवरोधों और मलबे की लगातार निगरानी की जरूरत बता रहे हैं.

हिमालय की यह घटना भारत के लिए भी चेतावनी
नेपाल की घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक जोखिम की ओर ध्यान खींचा है. बर्फ, ग्लेशियर, पानी, चट्टान और तापमान में बदलाव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. ऊंचाई पर होने वाली कोई छोटी घटना भी नीचे की नदी घाटियों में कुछ ही समय में गंभीर आपदा का रूप ले सकती है. इसका असर भारत के हिमालयी क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में ग्लेशियरों की नियमित निगरानी, आधुनिक चेतावनी प्रणाली, नदी घाटियों की मैपिंग और समय रहते स्थानीय आबादी को अलर्ट करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. नेपाल की बाढ़ ने साफ संकेत दिया है कि बदलते हिमालय को केवल मौसम के नजरिए से नहीं देखा जा सकता. ग्लेशियरों में होने वाले बदलाव अब आपदा प्रबंधन और सीमा पार रहने वाली आबादी की सुरक्षा से भी सीधे जुड़े हुए हैं.
 

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