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रांची/डेस्क: डालसा के अथक प्रयास से 50 साल पुराने मुक़दमे का समाधान हुआ. 2019 से सुप्रीम कोर्ट में वाद संख्या सी.ए. 4061/2019 दी स्टेट ऑफ झारखण्ड एंड अदर्स एवं कमीश्नर ऑफ कमर्शियल टेक्सेस बनाम मेसर्स टाटा स्टील लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा लंबित चल रहा था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा समाधान समारोह के लिए वाद को चिन्हित कर झालसा के द्वारा मध्यस्थता केंद्र, रांची में भेजा गया था.
1977-78 में कॉमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा 68,39,946 का पेनल्टी मेसर्स टाटा स्टील पर किया था. टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा पेनल्टी के विरूद्ध 25,00,000 रूपये जमा कर हाई कोर्ट में अपील की गयी थी. हाई कोर्ट द्वारा कमर्शियल टैक्सेस के पेनल्टी आदेश को निरस्त कर दिया गया था. जिसके खिलाफ कॉमर्शियल टेक्सेस डिपार्टमेंट, झारखण्ड द्वारा हाई कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जो सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था.
मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब 10 बैठकें की गयी और अंततः झारखण्ड सरकार की तरफ से कॉमर्शियल टेक्सेस डिपार्टमेंट के नोडल ऑफसर एसिस्टेंट कमिश्नर संजय प्रसाद द्वारा प्रस्तावित झारखण्ड कर समाधान योजना-2026 के अनुपालन के आलोक में टाटा स्टील के विधि विभाग के पदाधिकारी विकास मित्तल और आकर्षण कुमार के बीच आपसी विचार-विमर्श हुई. समझौता के बाद 25 लाख रूपये के भुगतान के उपरांत शेष राशि की पांच प्रतिशत राशि का भुगतान 30 दिनों के अंदर कॉमर्शियल डिपार्टमेंट को करने की सहमति बनी और दोनों पक्ष ने आपसी सहमति से सालों पुराने विवाद को समाप्त किया.
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