राहुल कुमार/न्यूज11भारत
लातेहार/डेस्क: लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत बनहरदी मौजा में प्रस्तावित कोल परियोजना को लेकर बुधवार को आयोजित ग्राम सभा में काफी लंबी बात चित के बाद भी नहीं बनी बात. पतरातू विद्युत ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (एनटीपीसी) की इस महत्वाकांक्षी बनहरदी कोल ब्लॉक परियोजना पर ग्रामीणों ने खुलकर विरोध जताया और कंपनी प्रबंधन पर नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया. बनहरदी तीन मुहान के समीप आयोजित इस ग्राम सभा में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर चर्चा की जानी थी. बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान इंद्रदेव उरांव ने की, जबकि अंचल अधिकारी सुमित कुमार झा और कंपनी के अधिकारी भी मौजूद रहे.
ग्रामीणों का आरोप: नियमों को किया गया नजरअंदाज
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने साफ कहा कि बनहरदी क्षेत्र पांचवी अनुसूची में आता है, जहां भूमि अधिग्रहण के लिए विशेष प्रावधान लागू होते हैं. इसके बावजूद कंपनी द्वारा ग्राम सभा की पूर्व अनुमति लिए बिना परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जिससे स्थानीय रैयतों में गहरा अविश्वास पैदा हुआ है.
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दिन पूर्व बिना सामूहिक सहमति के मुखिया व चुनिंदा लोगों को ओडिशा के डूडिंगा ले जाकर पुनर्वास मॉडल दिखाया गया और “लुभावने सपने” दिखाए गए, जो पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है.
कंपनी का पक्ष: मुआवजा और रोजगार का भरोसा
वहीं, कंपनी प्रबंधन ने परियोजना के उद्देश्य, विस्थापन एवं पुनर्वास नीति, एनयूटी पॉलिसी और सीबीए एक्ट की विस्तृत जानकारी दी. अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, रोजगार के अवसर, युवाओं के लिए प्रशिक्षण और 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति को लाभ देने की व्यवस्था की जाएगी.
हालांकि, प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि “जमीन के बदले जमीन” देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, जिस पर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया.
सहमति नहीं बनी, बैठक रही निष्फल
दोनों पक्षों के बीच लंबी चर्चा के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी. ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और एनओसी देने से इनकार कर दिया. अंततः ग्राम सभा बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई और कंपनी के अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा.
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