खराब स्ट्रीट लाइट

एक महीने से अंधेरे में डूबी बचरा सीआईएसएफ कॉलोनी, खराब स्ट्रीट लाइट से बढ़ी चिंता

बरसात में जहरीले सांपों का खतरा बढ़ा, सीसीएल कर्मियों व जवानों के परिजनों ने प्रबंधन से की शीघ्र मरम्मत की मांग

By : Ark Sahuliyar
एक महीने से अंधेरे में डूबी बचरा सीआईएसएफ कॉलोनी, खराब स्ट्रीट लाइट से बढ़ी चिंता

मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत 
खलारी/डेस्क:
सीसीएल पिपरवार क्षेत्र के सीआईएसएफ आवासीय परिसर कॉलोनी में पिछले लगभग एक महीने से अंधेरा पसरा हुआ है.कॉलोनी में लगी अधिकांश स्ट्रीट लाइटें खराब हो जाने के कारण शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है.इससे यहां रहने वाले सीसीएल कर्मियों, सीआईएसएफ के जवानों एवं उनके परिवार के सदस्यों को रोजाना कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.स्थानीय लोगों के अनुसार, सीसीएल प्रबंधन द्वारा कॉलोनी परिसर में सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं. हालांकि, समय के साथ एक-एक कर लगभग सभी स्ट्रीट लाइटें खराब हो गईं और पिछले एक महीने से उनकी मरम्मत नहीं कराई गई है.मात्र कुछ ही स्ट्रीट लाइट जल रही है.परिणामस्वरूप रात के समय कॉलोनी में आवागमन करना मुश्किल हो गया है. 

कॉलोनी वासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है. बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है. कॉलोनी के आसपास झाड़ियां और नमी बढ़ने के कारण जहरीले सांपों के निकलने की घटनाएं सामने आ रही हैं. ऐसे में अंधेरे के कारण लोगों में हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है. विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रात के समय क्वाटर से बाहर निकलने में डर का सामना करना पड़ता है.स्थानीय निवासियों ने बताया कि कॉलोनी में बच्चे अक्सर देर शाम तक खेलते-कूदते रहते हैं.लेकिन स्ट्रीट लाइट नहीं होने के कारण शाम होते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है.

कॉलोनी वासियों ने सीसीएल पिपरवार प्रबंधन से अविलंब खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कराने और कॉलोनी में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं,बल्कि कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है.