रांची जिले में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमिटी का गठन किया गया

By : Ark Sahuliyar
रांची जिले में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुपालन में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण हेतु जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय कमिटी का गठन किया गया है. निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी.

इस अधिनियम के आलोक में, निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूलने वाले विद्यालयों पर जिला स्तरीय कमिटी द्वारा उचित निर्णय लिया जा सकेगा. कमिटी के गठन से निजी विद्यालय अब मनमाने ढंग से फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे तथा अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी.

जिला स्तरीय कमिटी के सदस्य निम्नलिखित हैं:
- अध्यक्ष: उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची
- सदस्य: जिला शिक्षा पदाधिकारी
- सदस्य: जिला शिक्षा अधीक्षक
- सदस्य: जिला परिवहन पदाधिकारी
- सदस्य: एक सनदी लेखाकार (चार्टर्ड एकाउंटेंट)
- सदस्य: निजी विद्यालयों के दो प्राचार्य – गुरूनानक सीनियर सेकेण्डरी स्कूल, रांची एवं डी.ए.वी. कपिलदेव, रांची
- सदस्य: दिल्ली पब्लिक स्कूल, रांची के एक अभिभावक
- सदस्य: जवाहर विद्यालय मंदिर श्यामली, रांची के एक अभिभावक

इसके अतिरिक्त, रांची जिले के सभी माननीय सांसद एवं विधायकगण भी इस समिति के सदस्य हैं.

महत्वपूर्ण प्रावधान एवं निर्देश:
- प्रत्येक निजी विद्यालय को विद्यालय स्तरीय शुल्क निर्धारण कमिटी के साथ-साथ अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का भी गठन करना अनिवार्य होगा.
- कमिटी के गठन एवं सदस्यों की जानकारी विद्यालय के नोटिस बोर्ड एवं आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए.
- जिला स्तरीय कमिटी को शुल्क निर्धारण के साथ-साथ गवाहों को सम्मन जारी करने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण एवं साक्ष्यों की प्राप्ति का पूर्ण अधिकार होगा.
- विद्यालय परिसर में पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्रियों का क्रय-विक्रय नहीं किया जाएगा. विद्यालय किसी विशेष प्रतिष्ठान से सामग्री खरीदने हेतु अभिभावकों/छात्रों को बाध्य या प्रेरित नहीं कर सकेगा.
- अधिनियम की धारा 7(अ)(3) के अनुसार, विद्यालय भवन एवं परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा. कियोस्क या अन्य माध्यमों से अनिवार्य खरीद पर रोक रहेगी.
- उल्लंघन की स्थिति में ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. इसके अतिरिक्त, दोषी विद्यालय की मान्यता समाप्त करने हेतु उचित कार्रवाई की जाएगी.

यह कदम अभिभावकों के हित में एवं शिक्षा की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. सभी निजी विद्यालयों से अनुरोध है कि वे अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करें तथा किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर जिला स्तरीय कमिटी से संपर्क करें.

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