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रांची/डेस्क: जगन्नाथपुर मंदिर हत्याकांड में मारे गए चौकीदार बिरसा मुंडा.. राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी थे..1969 में मदुरै में हुए एक अंतरराष्ट्रीय मैच में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था. यह खिलाड़ियों की अपेक्षा की बदतरीन मिसाल है कि ऐसे खिलाड़ी को ना सरकारी नौकरी मिली और न कोई अन्य सुविधा. मिलता भी क्या था, चौकीदारी करने के एवज में सिर्फ ₹1500. बदकिस्मती यह भी कि पिछले तीन साल से उसका यह वेतन भी बकाया है.
जगन्नाथपुर मंदिर रांची में जिसकी नृशंस हत्या हुई, वह बिरसा मुंडा भले ही चौकीदार की नौकरी करते थे.. मगर अब मालूम हुआ के बिरसा मुंडा राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी थे, उनके घर में आज भी कई प्रशस्ति-पत्र मौजूद हैं, जिसमें लिखा है कि 1969 में बिरसा मुंडा ने चेन्नई में राष्ट्रीय हॉकी टीम के सदस्य के रूप में मैच खेला था और विजयी भी हुए थे, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के सामने परिवार जनों ने बिरसा मुंडा के वह सर्टिफिकेट प्रस्तुत किए.
सवाल उठता है कि अगर रेलवे टीम से राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी के रूप में शामिल हो चुके थे बिरसा मुंडा तो रेलवे ने उनकी सुधि क्यों नहीं ली और यह बात अब तक प्रेस मीडिया से भी छुपी क्यों रही, ऐसा होनहार खिलाड़ी, दैनिक वेतन भोगी मजदूर से भी न्यूनतम मजदूरी ₹1500 महीना पर काम भी कर रह महीना पर काम कर रहा था और पिछले तीन साल से उसे वेतन भी नहीं मिला, रांची सांसद भी यह सत्य सुनकर हैरान दिखे.
बिरसा मुंडा ने जीवन भर संघर्ष किया, भगवान जगन्नाथ से इतना प्रेम था कि पैसा नहीं मिलने पर भी सेवा से अलग नहीं हुए, कम से कम एक हॉकी के खिलाड़ी के रूप में, उन्हें पहचान अब भी मिल जानी चाहिए,
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