कुडू प्रखंड पुस्तकालय

गंदगी की गिरफ्त में कुडू प्रखंड पुस्तकालय, बदबू और बदहाल व्यवस्था से दूर हो रहे पाठक

कचरे का अंबार, बजबजाती नाली और बंद पुस्तकों का कमरा बना परेशानी का कारण

By : Ark Sahuliyar
गंदगी की गिरफ्त में कुडू प्रखंड पुस्तकालय, बदबू और बदहाल व्यवस्था से दूर हो रहे पाठक

न्यूज़11 भारत 
कुडू-लोहरदगा/डेस्क:
शिक्षा और ज्ञान के प्रसार के उद्देश्य से स्थापित कुडू स्थित प्रखंड स्तरीय पुस्तकालय आज बदहाली, गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा का प्रतीक बनकर रह गया है. पुस्तकालय के मुख्य द्वार के सामने और बगल में कचरे का अंबार, बजबजाती नाली तथा फैली गंदगी के कारण यहां पहुंचना भी चुनौती बन गया है. हालात इतने खराब हैं कि पुस्तकालय आने वाले छात्रों को अंदर प्रवेश करने के लिए ईंटों पर पैर रखकर गुजरना पड़ता है. दुर्गंध के कारण परिसर में कुछ देर रुकना भी मुश्किल हो जाता है. भाजपा युवा मंडल अध्यक्ष सरजू कुमार साहु ने पुस्तकालय परिसर का निरीक्षण किया. इस दौरान मौजूद छात्र संदीप यादव, विकास कुमार, अली मुर्तुजा अंसारी, मनीष उरांव, सुभाष उरांव, सुनील उरांव, सागर उरांव, फारूक अंसारी और विद्या कुमारी समेत अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि समस्या के समाधान को लेकर अंचल अधिकारी को कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. छात्रों ने बताया कि जिस कमरे में पुस्तकें रखी गई हैं, वह पिछले पांच माह से अधिक समय से बंद पड़ा है, जिससे पाठकों को पुस्तकों का लाभ नहीं मिल पा रहा है. विद्यार्थियों के अनुसार पुस्तकालय में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. शौचालय गंदगी से अटा पड़ा है और उसकी नियमित सफाई नहीं होने के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है. शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में कई छात्राएं एक-दो दिन आने के बाद दोबारा पुस्तकालय नहीं लौटीं. शुरुआत में यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए पहुंचते थे, लेकिन बढ़ती अव्यवस्था और दुर्गंध के कारण अब पाठकों की संख्या लगातार घटती जा रही है.

महज दो वर्षों में ही रखरखाव के अभाव ने बदली तस्वीर
गौरतलब है कि प्रखंड स्तर पर लोगों को पुस्तकों और सूचना संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंडित दीनदयाल भवन में विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) मद से लाखों रुपये खर्च कर समेकित जनजातीय विकास अभिकरण (आईटीडीए) लोहरदगा द्वारा इस पुस्तकालय की स्थापना की गई थी. भवन का रंग-रोगन, फर्नीचर और पुस्तकों की व्यवस्था के बाद 20 जनवरी 2023 को इसका उद्घाटन किया गया था. लेकिन उद्घाटन के महज दो वर्षों के भीतर ही रखरखाव के अभाव ने इसकी तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुस्तकालय के आसपास फैली गंदगी और दुर्गंध से राहगीरों, दुकानदारों तथा आसपास रहने वाले परिवारों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. लोग नाक पर रूमाल रखकर गुजरने को मजबूर हैं. उनका आरोप है कि शिकायतों और लिखित आवेदन के बावजूद संबंधित विभागों की उदासीनता बनी हुई है.

पुस्तकालय में सफाई व मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की मांग
जानकारी के अनुसार पुस्तकालय संचालन के लिए चौकीदार के अलावा पुस्तक वितरण और साफ-सफाई के लिए कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी. इसके बावजूद सफाई व्यवस्था लगभग ठप पड़ी है. नतीजा यह है कि पुस्तकालय के भीतर रखी टेबल-कुर्सियां भी धूल और गंदगी से ढकी रहती हैं, जिन्हें छात्र स्वयं साफ कर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.शिक्षा और ज्ञान का केंद्र बनने के उद्देश्य से स्थापित यह पुस्तकालय आज स्वयं बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. स्थानीय लोगों और  विद्यार्थियों ने प्रशासन से अविलंब सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने, पेयजल उपलब्ध कराने, शौचालय की नियमित सफाई सुनिश्चित करने तथा बंद पुस्तक कक्ष को खोलकर पुस्तकालय का सुचारू संचालन शुरू कराने की मांग की है, ताकि यह केंद्र फिर से विद्यार्थियों और पाठकों के लिए उपयोगी बन सके.