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रांची/डेस्क: बोकारो के तेतुलिया मौजा की करीब 103.88 एकड़ वन भूमि से जुड़े मामले में आरोपी शैलेश कुमार सिंह को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शैलेश सिंह की ओर से उनकी नियमित जमानत याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया. इससे पहले शैलेश सिंह की जमानत अर्जी निचली अदालत से भी खारिज हो चुकी थी. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी.
निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे थे
मामले में शैलेश कुमार सिंह ने रांची की निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन दिया था. 31 अगस्त 2026 को प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद शैलेश सिंह की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. अदालत ने आग्रह स्वीकार करते हुए जमानत याचिका को वापस लिया हुआ मानकर निस्तारित कर दिया. इस आदेश के साथ इस याचिका के जरिए शैलेश सिंह को हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिल सकी.
103.88 एकड़ वन भूमि को लेकर क्या है मामला?
मामला बोकारो जिले के चास थाना क्षेत्र के तेतुलिया मौजा की करीब 103.88 एकड़ सरकारी वन भूमि से जुड़ा है. आरोप है कि जमीन से संबंधित दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर सरकारी वन भूमि को निजी जमीन के रूप में दिखाने का प्रयास किया गया.
जांच के दौरान जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं. इनमें 1933 के कथित नीलामी प्रमाण पत्र का मामला भी शामिल है. जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी तरह के दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर अधिकार जताने का प्रयास किया गया.
मामले में जमीन की खरीद-बिक्री, दस्तावेजों की वैधता और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज भूमि की स्थिति समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है.
CID के बाद ED की जांच भी सामने आई
मामले में सीआईडी की ओर से जांच की जा रही है. इसी मामले से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी की जा रही है. जांच एजेंसियां जमीन से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ उससे जुड़े लेन-देन और संपत्तियों की भी जांच कर रही हैं.