श्रीकांत/न्यूज़11 भारत
गिरिडीह/डेस्क: जिले के पीरटांड़ के पालगंज स्थित बंशीधर मंदिर का इतिहास लगभग 651 वर्ष पुराना है. यहां आज भी पौराणिक तरीके से लगातार चार दिनों तक वृंदावन की तर्ज पर जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाता है. ढोल-नगाड़े की थाप पर श्रद्धालु नृत्य करते हुए मंदिर प्रांगन पहुंचते है और जन्माष्टमी मनाते हैं.भगवान की पूजा करने वाले पुरोहित परिवार से जुड़े शरद भक्त ने बताया कि बंशीधर मंदिर का इतिहास काफी पुराना और रोचक है कहा जाता है करीब 651 वर्ष पूर्व धनवार प्रदेश में एक ग्वाला खेमचंद भक्त को खेत जोतते वक्त भगवान बंशीधर मिले थे. ग्वाला के घर रात को रोज भजन गाया जाता था सपने में इसकी जानकारी प्रदेश के राजा को लगी और उन्होंने ग्वाला के यहां आकर भगवान की मूर्ति को ले लिया . बाद में राजा को फिर से सपना आया जिसमें भगवान ने कहा कि मैं तो खेमचंद भक्त के लिए आया हूं. राजा ने भगवान की मूर्ति को खेमचंद भक्त को सुपुर्द कर दी खेमंचद इस मूर्ति को लेकर सभी धाम घूमे. घूमने के क्रम में पालगंज में उक्त मूर्ति को स्थापित किया गया तब से यहां पर भगवान बंशीधर की पूजा धूमधाम से की जा रही है आज भी भगवान को पसीना आता है और भगवान कइयों के स्वपन में आते है यहां जो लोग मन्नत मांगते है भगवान उनकी झोली भरते है.
बंशीधर मंदिर का इतिहास
लगभग 651 वर्ष पुराना है पालगंज स्थित बंशीधर मंदिर का इतिहास, वृंदावन की तर्ज पर मनाया जाता है जन्माष्टमी महोत्सव
जिले के पीरटांड़ के पालगंज स्थित बंशीधर मंदिर का इतिहास लगभग 651 वर्ष पुराना है.
By :
Ark Sahuliyar
•