न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अब प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने जा रही है। इसके तहत हर विभाग में “सहयोग सेल” का गठन किया जाएगा, जो सहयोग शिविरों में आने वाले आवेदनों और शिकायतों की लगातार निगरानी करेगा। इस सेल में एक नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी पोर्टल पर दर्ज आवेदनों की समीक्षा करना और उनकी स्थिति से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराना होगा।
हाईलाइट्स -
- ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए हर विभाग में बनेगा सहयोग सेल
- नोडल पदाधिकारी पोर्टल पर आवेदनों की करेंगे निगरानी
- जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक गठित होगा विशेष सेल
- हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगेगा सहयोग शिविर
- 19 मई से राज्यभर में शुरू होगी नई व्यवस्था
- 30 दिनों के भीतर शिकायतों के निस्तारण का लक्ष्य
विभाग से लेकर प्रखंड स्तर तक बनेगा सहयोग सेल
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, जिला पदाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सहयोग शिविर में प्राप्त मामलों का तय समयसीमा में निपटारा हो सके, इसके लिए अलग से सहयोग सेल बनाना जरूरी है। जिला स्तर पर गठित यह सेल आगे अंचल और प्रखंड स्तर तक कार्य करेगा। संबंधित पदाधिकारी लंबित मामलों की निगरानी करेंगे और समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए नियमित रिपोर्ट सक्षम प्राधिकार को देंगे।
हर महीने दो बार लगेगा सहयोग शिविर
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याओं का 30 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को “सहयोग शिविर” आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों की शुरुआत 19 मई से होने जा रही है। शिविरों में आम लोग सीधे अपनी शिकायत और आवेदन प्रशासन के समक्ष रख सकेंगे, जिनका ऑनलाइन रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने जारी किए दिशा-निर्देश
इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसी के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को सहयोग सेल गठित करने और नोडल अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण जनता की समस्याओं का समाधान तेज और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।
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