संसद सत्र

राजनीति के नए बनते समीकरणों के बीच एक बार फिर परिसीमन बिल की तैयारी! मानसून सत्र में आ सकते हैं कुछ अहम बिल

टीएमसी और शिवसेना-यूबीटी टूट और राज्यसभा चुनाव में शानदार जीत से मोदी सरकार के हौसले बुलंद

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
राजनीति के नए बनते समीकरणों के बीच एक बार फिर परिसीमन बिल की तैयारी! मानसून सत्र में आ सकते हैं कुछ अहम बिल

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत, उसके बाद टीएमसी की पार्टी में हुई जबरदस्त टूट, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे वाली सेना में सांसदों की बड़ी भगदड़ और राज्यसभा चुनाव में एनडीए की शानदार जीत ने केन्द्र की मोदी सरकार के हौसले और बुलंद कर दिए हैं. मोदी सरकार की निगाहें एक बार फिर से परिसीमन बिल को सदन से पास कराने पर लग गई हैं. संसद के दोनों सदनों में बहुमत का आंकड़ो तो एनडीए के पास है, लेकिन दो तिहाई बहुमत के लिए उसे अभी भी मगजमारी करनी पड़ेगी. टीएमसी और शिवसेना-यूबीटी की टूट से दो तिहाई बहुमत की ओर थोड़ी और खिसकी है, लेकिन मंजिल अभी भी दूर है. ग्रीष्मकालीन सत्र की तरह केन्द्र सरकार मानसून सत्र में कोई गड़बड़ी नहीं होने देना चाहती, इसलिए इस बार वह पूरी तरह से फूंक-फूंक कर ही कदम उठाएगी. लेकिन सवाल अभी भी शेष है कि दोनों सदनों में वह दो तिहाई का आंकड़ा कैसे छू पाएगी?

अगले महीने यानी जुलाई में संसद का मॉनसून सत्र शुरू होगा. केन्द्र सरकार को विश्वास है कि मानसून सत्र महिला आरक्षण को लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए परिसीमन से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण विधेयक को सदन से पारित करा लेगी. बीजेपी 2029 के आम चुनाव से पहले पूरे देश में 'एक देश, एक चुनाव भी कराना चाहती है. 

अब सवाल है कि एनडीए सरकार इन विधेयकों को सदन में कैसे पास करापाएगी.  वर्तमान में लोकसभा में 540 सांसद हैं. लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 वोटों की दरकार होगी. पिछले संसद सत्र में एनडीए सरकार 293 वोट ही जुटा पाई थी. पिछले सत्र और आगामी सत्र में जो राजनीतिक बदलाव हुए हैं, उसके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 बागी सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 बागी सांसदों का पाला बदलना एनडीए को फायदा पहुंचाएगा. फिर भी आंकड़ा 319 तक ही पहुंच रहा है. यानी 360 से 41 कम. अब यहां पर एनडीए सरकार के पास दो सम्भावनाएं और बन सकती हैं. एक, बीजेपी अगर अपनी धुर प्रतिद्वन्द्वी पार्टी डीएमके को समर्थन के लिए राजी करले. बता दें कि डीएमके के पास अभी 22 सांसद है. एक नयी सम्भावनाओं की सुगबुगाहट भी बीजेपी की बांछें खिला सकती है. केन्द्रीय मंत्री ओपी राजभर ने दावा किया है कि 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी और कुछ विपक्ष दलों में भी बड़ी बगावत होने वाली है. अगर यह बगावत वाकई में होती है तो यह एनडीए सरकार को बड़ी ताकत देगी.

उसी तरह 245 सांसदों वाली राज्यसभा में भी एनडीए की वर्तमान ताकत 150 के करीब पहुंच गई है. यहां पर एनडीए को 163 वोटों की जरूरत होगी. एनडीए सरकार को उम्मीद है कि देश में ताजा राजनीतिक हालात का यहां भी उसे फायदा मिल सकेगा. 

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