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रांची/डेस्क: मामला बेशक मध्य प्रदेश के जबलपुर का है, लेकिन यह पूरे देश की समस्या है. देश का लगभग हर शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा का राज हो गया है. भले ही आम लोगों की सुविधा के लिए है, लेकिन महसूस किया जा रहा है कि यह सुविधा दिनोदिन मुसीबत बन रही है. ई-रिक्शा की सड़कों पर इतनी भीड़ हो गई है कि दूसरे वाहनों के साथ पैदल चलने वालों को भी परेशानी होने लगी है. इसी परेशानी से जूझते जबलपुर का मामला मध्यप्रदेश के हाई कोर्ट जा पहुंचा है. कोर्ट ने भी समस्या की गंभीरता को महसूस किया और केन्द्र सरकार के लिए निर्देश जारी कर दिया.
ई-रिक्शा और उनके अनियंत्रित संचालन को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह 60 दिन के भीतर पूरे देश के लिए एक समान नीति तैयार करे कि ई-रिक्शा का सड़कों पर संचालन किस प्रकार होना चाहिए. नीति तैयार होने के बाद उसे सभी राज्यों को भेजा जाए ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्था लागू कर सकें और सड़कों पर ई-रिक्शा का परिचालन नियंत्रित हो सके. हाई कोर्ट का यह आदेश ई-रिक्शा की संख्या, उनके रूट परमिट और यातायात के दबाव को कम करने जैसे उपाय को लेकर था.
हाई कोर्ट के आदेश का महत्वपूर्ण पहलू ई-रिक्शा की संख्या और उनके मार्गों के निर्धारण को लेकर था. कोर्ट ने केन्द्र सरकार पर यह जिम्मा छोड़ दिया है कि वह ई-रिक्शा की संख्या को कैसे नियंत्रित करती है. क्योंकि शहरों की असल समस्या ई-रिक्शा का सड़कों पर बढ़ता हुआ दबाव ही है. जिससे शहर की यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है. सड़क पर उपलब्ध स्थान और यातायात क्षमता के बीच संतुलन बनाते हुए ई-रिक्शों के परिचालन की नीति तैयार की जाए.