प्रमोद जायसवाल/न्यूज11 भारत
रांची/डेस्क: हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज भले ही राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में हिंदी को उछूत भाषा साबित करने का प्रयास किया जाता है. लेकिन सच्चाई इससे अलग है. भारतीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर हिंदी की पैठ इतने गहरे पड़ गई है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता. आज ज्ञान-विज्ञान का कौन का क्षेत्र है जहां हिंदी ने जड़ नहीं जमाया है.हर क्षेत्र में हिंदी का दबदबा है और यही भारत की ताकत है.
डिजिटल और इंटरनेट
डिजिटल और इंटरनेट में पर हिंदी का पूरा प्रभाव देखा जा सकता है.दुनिया का सबसे बड़े सर्च इंजन Google, हो, सोशल मीडिया के सशक्त माध्य YouTube और Facebook पर भी हिंदी का ही राज है. आंकड़ों के लिहाज से भी देखें तो दुनिया भर में 60 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट पर हिंदी में सर्च करते हैं. तकनीक की दुनिया का सबसे बड़ा भौकाल AI भी हिंदी के रास्ते पर चलना लगा है. जो भाषा इंटरनेट पर राज कर रही हो, उसे अछूत कैसे किया जा सकता है. सच तो यह है कि हिंदी आज भी राज कर रही है भविष्य में भी राज करेगी.
सिनेमा और मनोरंजन हिंदी से समृद्ध
भारतीय सिनेमा के 100 साल से अधिक समय हो गये हैं. हिंदी ने ही इस क्षेत्र को आगे बढ़ाया है. अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का फिल्मी सफर तो बाद में शुरू हुआ है. आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो हिंदी सिनेमा सिर्फ देशीय नहीं अन्तरदेशीय यानी वैश्विक हो गया है. फिल्मों का आज तो माहौल ही बदल गया है. हिंदी डबिंग से ही पैन-इंडिया को पहचान मिलती है. OTT पर सबसे ज्यादा हिंदी फिल्में देखी जाती हैं.
बाजार भी हिंदी को समझने लगा है
चूंकि आज का बाजार वैश्विक हो गया है. भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में है. विदेशी कंपनियां भी इस बात को अच्छे से समझने लगी हैं कि भारत में अगर सामान बेचना है तो सबसे ज्यादा जरूरत हिंदी की होगी. क्योंकि भारत के कई राज्यों में हिंदी का ही वर्चस्व है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों को मिलाकर देखें तो करीब आधी आबादी तो हिंदी ही बोलती है. ऐसे में विदेशी कंपनियां भी यह अच्छे से समझती हैं कि हिंदी में सामान बेचेंगे तो उनका काम आधा आसान तो ऐसे ही हो जाएगा.
शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान
देश की नई शिक्षा नीति में सामान्य पढ़ाई को ही नहीं, बल्कि तकनीकी यहां तक कि मेडिकल और इंजीनियरिंग तक में हिंदी में बढ़ाई के मार्ग खोल दिए हैं. ISRO, DRDO के वैज्ञानिक अब अपने आविष्कार हिंदी में भी समझा रहे हैं. आज तो स्थिति यह है कि दूसरे देशों में भी हिंदी में पढ़ाई जा रही है जो कि हिंदी के विस्तार की कहानी कह रही है. अमेरिका में ही 100 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है. फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम में तो हिंदी दूसरी राजभाषा की तरह है. अब तो संयुक्त राष्ट्र में भी हिंदी को जगह मिल गई है.
किसी ने सही कहा है कि हिंदी दुनिया की एकमात्र ऐसी भाषा है, जो 'अ' अनपढ़ से शुरू होकर 'ज्ञ' ज्ञानी पर समाप्त होती है। सच कहा जाए तो अंग्रेजी ने दुनिया को जोड़ा है, पर हिंदी ने आपस में जोड़ने का काम किया है. हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, भावना है.
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