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रांची/डेस्क: एक बार फिर भारत का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन मंगलवार को लम्बे अंतरिक्ष मिशन पर निकले हैं. नासा के बड़े मिशन पर भारतीय समय के अनुसार मंगलवार रात 8:17 बजे अनिल मेनन की यह अंतरिक्ष की उड़ान शुरू हुई. कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए अनिल मेनन अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हुए. अनिल मेनन करीब 8 महीने अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताएंगे और इस दौरान वह कई वैज्ञानिक शोध और प्रयोग करेंगे.
पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन डॉक्टर अनिल मेनन 2014 में नासा से जुड़े थे. इसके बाद 2021 में वह अंतरिक्ष यात्री चुने गए. जिस अंतरिक्ष मिशन पर वह निकले हैं, उसकी वह 2 वर्षों से तैयारी कर रहे थे. अनिल अमेरिकी स्पेस फोर्स के कर्नल और नासा के पूर्व फ्लाइट सर्जन हैं।
अनिल मेनन आठ महीने तक करेंगे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध
अनिल मेनन 240 दिन तक ISS पर रहकर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध करने वाले हैं-
- स्पेस मेडिसिन - माइक्रोग्रैविटी में ब्लड फ्लो, नसों की बनावट और ब्लड कंपोजिशन कैसे बदलता है.
- ISS के पीने के पानी से मेडिकल ग्रेड के इंट्रावेनस फ्लुइड बनाने की टेक्नोलॉजी टेस्ट करेंगे।
- माइक्रोग्रैविटी में हाई-प्योरिटी सेमीकंडक्टर क्रिस्टल बनाना। इससे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, AI सिस्टम और मेडिकल डिवाइस के लिए बेहतर चिप्स बन सकते हैं।
- माइक्रोग्रैविटी में खून की नली जैसी स्ट्रक्चर प्रिंट करना। इससे एजिंग और फ्यूचर मेडिकल ट्रीटमेंट में मदद मिलेगी.
इन शोधों से भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों, नई तकनीकों और पृथ्वी पर चिकित्सा तथा विज्ञान के क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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