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रांची/डेस्क: आज पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. आज के दिन देश ही नहीं, विदेशों में भी श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इन दिन कई श्रद्धालु व्रत रखकर रात्रि के समय में कृष्ण के जन्म का आनन्द उठाते हैं. आज कृष्ण जन्माष्टमी के साथ मास कालाष्टमी भी है और सिर्फ कृष्ण जन्म का ही नहीं, 5 और भी व्रत है जो भक्त रख सकते हैं। इतना ही नहीं, जन्माष्टमी के अवसर पर लक्ष्मी पूजा का भी संयोग बना है. यानी लक्ष्मी की आराधना करके धन-संपत्ति में वृद्धि की कामना भी भक्त कर सकते हैं.
जन्माष्टमी के साथ इन 5 व्रतों का बना है संयोग
कृष्ण जन्माष्टमी : भाद्रपद यानी भादो की कृष्ण पक्ष कीअष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस दिन जन्माष्टमी व्रत रखा जाता है. आज यानी शुक्रवार को रात्रि 2:25 बजे से भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि शुरू हो चुकी है. यह तिथि 5 सितंबर को रात्रि 12:13 बजे तक मानी जाएगी. उदयातिथि के आधार पर जन्माष्टमी व्रत 4 सितंबर को रखा जा रहा है. आज व्रत रखा जाएगा और रात्रि में बाल गोपाल का जन्म उत्सव मनाया जाएगा.
मास कालाष्टमी: मास कालाष्टमी व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ती है. इस दिन काल भैरव की पूजा की जाती है. पूजा का मुहूर्त निशिता काल में होता है. निशिता मुहूर्त आज रात में 11:57 बजे से 5 सितंबर को रात 12:43 बजे तक रहेगा. इस दिन रोग, दोष, कष्ट दूर करने के लिए मंत्र जाप, पूजा पाठ आदि करते हैं. मान्यता है कि इस दिन जाप करने से अकाल मृत्यु के भय का नाश होता है. तंत्र-मंत्र की नकरात्मकता भी मिट जाती है.
काली जयंती: 10 महाविद्यायों में देवी काली प्रथम महाविद्या हैं. यह संयोग है कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को काली जयंती भी मनाते हैं. माता काली रक्त और कृष्ण दोनों वर्ण की हैं. रक्त वर्ण वाली मां काली को सुंदरी और कृष्ण वर्ण वाली काली को दक्षिणा काली कहा जाता है. जन्माष्टमी पर मां काली की भी जयंती मनाई जाएगी. उनकी भी पूजा निशिता मुहूर्त में ही की जाएगी.
विन्ध्यवासिनी जयंती: कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मां विन्ध्यवासिनी जयंती भी मनाते हैं. कहा जाता है कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को विन्ध्यवासिनी देवी की उत्पत्ति हुई थी. विन्ध्याचल पर्वत पर निवास करने के कारण इनका नाम विन्ध्यवासिनी पड़ा है. देवी विन्ध्यवासिनी आदि महाशक्ति हैं. इनकी पूजा आराधना से सभी प्रकार के रोग, कष्ट, शोक एवं संकट नष्ट हो जाते हैं.
अगस्त्य अर्घ्य: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन अगस्त्य अर्घ्य देने की भी पंरपरा है. 4 सितंबर को अगस्त्य अर्घ्य देने का समय प्रात:काल 4 बजकर 58 मिनट से सुबह 6:00 बजे तक था. मान्यता है कि जो व्यक्ति अगस्त्य ऋषि को अर्घ्य देता है, उसे मृत्यु के बाद परब्रह्म की प्राप्ति होती है.
लक्ष्मी पूजा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को भगवान विष्णु का कृष्णावतार हुआ था. आज के दिन शुक्रवार व्रत और लक्ष्मी पूजा का संयोग है. जन्माष्टमी के अवसर पर माता लक्ष्मी की पूजा करके अपने धन संपत्ति में बढ़ोतरी की कामना कर सकते हैं. लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है इसका संयोग सूर्यास्त के बाद. 6:39 बजे पर बन रहा है.
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