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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ और दुमका जिले में संचालित पैनम कोल माइंस में कथित अवैध खनन और राज्य सरकार को हुए राजस्व नुकसान के मामले को गंभीर मानते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (एडीजी) को प्रीलिमिनरी इन्वेस्टीगेशन (प्रारंभिक जांच) करने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम एस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को भी मामले में अब तक की कार्रवाई और जांच की स्थिति पर एफिडेविट के माध्यम से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पैनम कोल माइंस में लीज की शर्तों और खनन नियमों के कथित उल्लंघन के कारण राज्य सरकार को करीब 99 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. याचिकाकर्ता राम सुहाग सिंह का आरोप है कि अवैध खनन की शिकायतों और सरकारी जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बावजूद लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि अवैध खनन में किन अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य व्यक्तियों की भूमिका रही और राज्य को हुए नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है. यदि प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाते हैं तो एसीबी कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई करेगी.
पैनम कोल माइंस पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पूर्व में पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड) और एक निजी कंपनी का संयुक्त उपक्रम है. कंपनी को पंचवारा सेंट्रल कोल ब्लॉक से कोयला खनन का अधिकार दिया गया था. आरोप है कि कंपनी ने निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व क्षति हुई. इस मामले को लेकर पहले भी हाईकोर्ट ने बकाया रॉयल्टी की वसूली और कंपनी की संपत्ति कुर्क करने संबंधी कड़े निर्देश दिए थे.
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