पंकज कुमार/न्यूज़11 भारत
घाघरा/डेस्क: सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक पहल का इंतजार करते-करते आखिरकार बेती जगनू टोली के ग्रामीण थक गए. सड़क निर्माण की उम्मीद लंबे समय तक अधूरी रहने के बाद ग्रामीणों ने एक बार फिर व्यवस्था का इंतजार छोड़ अपने हाथों में औजार उठा लिए. घाघरा प्रखंड अंतर्गत चुंदरी पंचायत के बेती जगनू टोली के ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान कर करीब एक किलोमीटर सड़क का निर्माण कर आवागमन का रास्ता तैयार कर दिया.
ग्रामीणों के अनुसार, गांव तक बेहतर सड़क पहुंचाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकारी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी. आखिरकार ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और एकजुटता का परिचय देते हुए खुद ही सड़क निर्माण का बीड़ा उठा लिया. लोगों ने सामूहिक श्रमदान कर जर्जर रास्ते को समतल किया और उसे आवागमन योग्य बनाया. एक साल पहले भी श्रमदान से बनाई थी सड़क सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक वर्ष पूर्व भी इसी सड़क को ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाया था. समय बीतने के साथ सड़क फिर जर्जर हो गई, लेकिन इसके स्थायी निर्माण के लिए अब तक कोई प्रभावी सरकारी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. नतीजतन ग्रामीणों को दूसरी बार अपने श्रम के भरोसे सड़क तैयार करनी पड़ी.
मेहनत की मिसाल, व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों की यह पहल एक ओर उनकी मेहनत, एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करती है, तो दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं को लेकर व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है. सवाल यह है कि आखिर सड़क जैसी आवश्यक सुविधा के लिए ग्रामीणों को कब तक हर साल श्रमदान कर अपनी राह बनानी पड़ेगी?
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बेती जगनू टोली की इस सड़क का जल्द स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को हर वर्ष अपने दम पर सड़क बनाने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके.
इसे भी पढ़ें: झारखंड में शिक्षा विभाग बनी पनौती! लगातार तीन मंत्रियों का निधन