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रांची/डेस्क: झारखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए राज्य के बेहद चर्चित और लगभग 100 करोड़ रुपये के मध्याह्न भोजन वित्तीय हेरफेर से जुड़े मामले में आरोपी गिरिजा शंकर कुमार को बड़ी राहत दी है. न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की कोर्ट ने गिरिजा शंकर कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है.
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिजा शंकर कुमार की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने दलीलें पेश कीं. कोर्ट को बताया कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई (CBI) द्वारा पहले ही पूरी की जा चुकी है और इस मामले के अन्य पहलुओं में पूर्व में भी सहयोग किया गया है. जिसका सीबीआई की ओर से पक्ष रख रहे वरीय अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने विरोध किया. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम राहत प्रदान किया.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2017 में धनबाद और रांची संभाग में दर्ज सीबीआई आरसी केस संख्या 80/2017 (RC Case No. 0000080/2017) से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की हटिया शाखा से झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) प्राधिकरण के खाते की लगभग 100 करोड़ की सरकारी राशि को नियमों को ताक पर रखकर 'भानु कंस्ट्रक्शन' नामक एक निजी कंपनी के खाते में डायवर्ट कर दिया गया था. गिरिजा शंकर कुमार पर 'सनप्लांट ग्रुप' की कंपनियों के माध्यम से इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और साजिश में शामिल होने का आरोप केंद्रीय जांच एजेंसी ने लगाया था, जिसका ट्रायल वर्तमान में धनबाद की विशेष अदालत में चल रहा है.
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