मुमताज अहमद/न्यूज़11 भारत
खलारी/डेस्क: खलारी अंचल प्रशासन के नाक के नीचे खलारी पंचायत स्थित मैरिज हाल एवं ईद मिलाद-उन-नबी स्थल की भूमि पर कथित कब्जे और दावेदारी को लेकर घमासान मचा हुआ है. एक ही भूमि पर दो पक्ष आमने-सामने हैं. एक ओर शिवानी देवी पति (संटू यादव) भूमि को अपना बताते हुए कथित रूप से अवैध मकान का निर्माण करा रही हैं, तो दूसरी ओर केडी चाणक्य धौड़ा निवासी रौशनलाल राम स्वगीर्य जगदीश राम भी उसी भूमि पर अपना दावा ठोक रहे हैं. अंचल स्तर पर दोनों पक्षों के दावों के समर्थन में स्पष्ट कागजात उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बावजूद इसके विवादित भूमि पर अवैध मकान निर्माण और दावेदारी का सिलसिला जारी है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कानून और राजस्व अभिलेखों से ऊपर किसकी प्रभाव चल रहा है ?
लोगों के अनुसार, उक्त भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है. शिवानी देवी का कहना है कि भूमि उनकी है और इसी आधार पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है. दूसरी ओर रौशनलाल राम भी भूमि पर अपना अधिकार बताते हुए कानून और कागजात का हवाला दे रहे हैं. दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने आने के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग अब तूल पकड़ने लगी है.
उक्त मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि अंचल ने दोनों पक्षों की दावेदारी के समर्थन में स्पष्ट और निर्णायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है. इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है, तो यह सवाल सीधे अंचल प्रशासन की कार्यशैली पर उठता है. आखिर स्वामित्व स्पष्ट हुए बिना विवादित भूमि पर निर्माण कैसे शुरू हुआ और प्रशासन ने समय रहते इसे रोकने की पहल क्यों नहीं कर रही ?
सूत्रों की मानें तो सूत्र बताते हैं शिवानी देवी सत्ता में बैठे प्रभावशाली सफेदपोश नेताओं की कथित हनक और पहुंच का हवाला देते हुए भूमि पर कब्जा कर मकान निर्माण करा रही हैं. दूसरी ओर रौशनलाल राम की दावेदारी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर निजी स्वार्थ के आरोप लगाए जा रहे हैं और बताते हैं कि यह भूमि रौशनलाल राम की भी नहीं है लेकिन विधायक प्रतिनिधि होने के साथ -साथ सफेद पोश नेताओं की पैरवी भी काम कर रही है ऐसे में दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच कर कानूनी हस्ताक्षेप जरूरी हो गई है.
‘भूमि मेरी है, अंचल या कोर्ट कोई कुछ नहीं कर सकता’—कथित बयान से बढ़ा विवाद
मामला गंभीर तब हुआ जब शिवानी देवी से उक्त मामले के संबंध में जानकारी लेने के क्रम में गंभीर आवाज में शिवानी देवी ने कहा कि —“भूमि मेरी है, अंचल या कोर्ट कोई भी मेरा कुछ नहीं कर सकता, आपको जो लिखना है लिख दीजिए.” यदि यह बयान सही है, तो यह अंचल के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी गंभीर सवाल खड़ा करता है. सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर किसी व्यक्ति को इतना विश्वास हो सकता है कि अंचल प्रशासन अथवा न्यायालय भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता? क्या इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति का निर्देश या संरक्षण है? क्या सत्ता में बैठे किसी सफेदपोश की कथित हनक इस विवाद में काम कर रही है? या फिर यह महज व्यक्तिगत आत्मविश्वास है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है.
रौशनलाल की दावेदारी भी जांच के घेरे में
दूसरी ओर रौशनलाल राम पिता स्वर्गीय जगदीश राम भी उक्त भूमि पर अपना अधिकार जताते हुए कानून और कागजात का हवाला दे रहे हैं. लेकिन यदि अंचल स्तर पर उनके दावे के समर्थन में भी स्पष्ट स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी दावेदारी की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है. आखिर भूमि पर वास्तविक अधिकार किसका है, इसका फैसला दबदबे, राजनीतिक पहुंच या दावे से नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड और वैध दस्तावेजों से होना चाहिए.
अंचल प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पूरे मामले में अंचल प्रशासन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. जब एक ही भूमि पर दो पक्ष अपना अधिकार जता रहे हों और निर्माण कार्य किए जाने की शिकायत सामने आ रही हो, तो राजस्व विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल स्थल निरीक्षण कर भूमि का सीमांकन कराए और खाता, प्लॉट, जमाबंदी तथा स्वामित्व संबंधी अभिलेखों की जांच करे.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि सरकारी अथवा सार्वजनिक उपयोग की है और जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो प्रशासन को बिना किसी दबाव के नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए. वहीं यदि भूमि निजी है तो उसके वैध स्वामित्व का स्पष्ट निर्धारण कर विवाद का समाधान किया जाना चाहिए.
फिलहाल सवाल यह है कि खलारी अंचल के नाक के नीचे चल रहे इस विवाद में कानून भारी पड़ेगा या कथित प्रभाव और पहुंच? क्या प्रशासन दोनों पक्षों की दावेदारी की निष्पक्ष जांच कर भूमि की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करेगा ? या फिर मामला राजनीतिक प्रभाव और निजी दावेदारी के बीच यूं ही उलझा रहेगा? स्थानीय लोगों की निगाह अब अंचल प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यह एक गंभीर सवाल है?