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CGL विवाद: बरवाडीह एमओ सुमित तिवारी ने अभय तिवारी से रिश्तेदारी के आरोपों को बताया निराधार 

सीजीएल परीक्षा से जुड़े विवाद में अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उससे कथित रूप से जुड़े कई लोगों के नाम सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में चर्चा में आ रहे हैं.

By : Dipali Kumari
CGL विवाद: बरवाडीह एमओ सुमित तिवारी ने अभय तिवारी से रिश्तेदारी के आरोपों को बताया निराधार 

प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क:
सीजीएल परीक्षा से जुड़े विवाद में अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उससे कथित रूप से जुड़े कई लोगों के नाम सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में चर्चा में आ रहे हैं. इसी क्रम में बरवाडीह के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) सुमित कुमार तिवारी का नाम भी चर्चा में आने के बाद उन्होंने पूरे मामले पर अपनी सफाई दी है. सुमित कुमार तिवारी ने अभय तिवारी से किसी भी प्रकार की पारिवारिक अथवा रिश्तेदारी होने के दावे को पूरी तरह निराधार बताया है. 

एमओ सुमित कुमार तिवारी ने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके और आरोपी अभय तिवारी के बीच रिश्तेदारी को लेकर जिस तरह की बातें प्रसारित की जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि अभय तिवारी से उनके पूरे खानदान का दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है. उन्होंने बताया कि उनका ननिहाल पलामू जिले के सिगरा में है और उनके तीनों मामा भी सिगरा में ही रहते हैं. उनके अनुसार, उनके मामा पक्ष की भी आरोपी अभय तिवारी के गृह जिले या परिवार से किसी प्रकार की रिश्तेदारी नहीं है. 

उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और विरोध किया जाना उनका अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के बारे में बिना सत्यापन के गलत जानकारी फैलाना और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई बातें तथ्यों से परे हैं, जिससे उनकी और अन्य लोगों की छवि प्रभावित हो रही है. सुमित कुमार तिवारी ने कहा कि इसी मामले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी तेज नारायण पंडित को भी अभय तिवारी के चाचा के साढ़ू का बेटा बताया जा रहा है, जबकि यह दावा भी गलत है. 

उन्होंने बताया कि तेज नारायण पंडित ओबीसी कोटे से कुम्हार समाज से आते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति समेत संबंधित सभी नियुक्तियां न्यायालय के आदेश के माध्यम से हुई हैं और वे सभी निर्धारित शैक्षणिक एवं अन्य योग्यताएं पूरी करते हैं. उन्होंने कहा कि यदि आंदोलनरत संगठन या कोई अन्य पक्ष उनकी नियुक्ति और परीक्षा परिणाम को लेकर जांच कराना चाहता है तो वे किसी भी सक्षम जांच एजेंसी अथवा न्यायालय के माध्यम से जांच के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह की कहाँ की जांच पूरी होते ही सभी सच्चाई सामने आ जाएगी जिसके लिए तैयार है.

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