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जादूगोड़ा/डेस्क: यूसिल की तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट के मुख्य गेट में रविवार का दिन बादू हुरांग यूरेनियम प्रोजेक्ट के 226 पूर्व ठेका मजदूरों के लिए खुशियों भर दिन रहा . हो भी क्यो नहीं. 13 साल बाद धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट द्वारा यूसिल की बादू हुरांग यूरेनियम प्रोजेक्ट के 226 पूर्व ठेका मजदूरों को ढाई करोड़ रुपये भुगतान का आदेश के प्रतियां झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के केंद्रीय महासचिव डी सी गुहाई ने ऑन स्पॉट पढ़ कर सुनाई . उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले की कॉपी यूसिल के उपमहाप्रबंधक राकेश कुमार की जल्द से सौंपी जाएगा ताकि यूसिल की पूर्व ठेका कंपनी गल्फ ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के 226 मजदूरों की बकाया राशि का भुगतान मिल सके.
उन्होंने कहा कि यूसिल प्रबंधन भुगतान नहीं करती है तो कंपनी के खिलाफ धनबाद कोर्ट में अवमानना का मुकदमा किया जाएगा इधर फैसले को लागू कराने को लेकर कोल्हान समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक की गई.बैठक में मुख्य रूप से यूनियन के महामंत्री कॉमरेड डी सी गोहाई उपस्थित थे.. यूनियन के महामंत्री ने कोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि को पढ़कर तत्कालीन पीड़ित मजदूरों को पढ़ कर सुनाया. यहां बताते चले कि यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बादू हुरांग यूरेनियम माइंस में वर्ष 2013 के दौरान कार्यरत 226 ठेका मजदूरों के लंबे कानूनी संघर्ष के सफलता मिली है. धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए यूसिल की पूर्व ठेका कंपनी गल्फ ऑयल कॉरपोरेशन को 226 मजदूरों के पक्ष में लगभग ₹2.50 करोड़ (ढाई करोड़ रुपये) की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है.
यह फैसला उन मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण राहत है, जो वर्षों से अपने श्रम से संबंधित बकाया एवं वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे.वर्षों के संघर्ष के बाद न्याय मिला. वर्ष 2013 में बंदुहुरंग माइंस में कार्यरत रहे इन 226 ठेका मजदूरों के मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी. मजदूरों का पक्ष था कि उन्हें उनके श्रम एवं सेवा से संबंधित देय राशि व वैधानिक लाभों से वंचित किया गया.
मामले की सुनवाई के उपरांत धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट द्वारा लगभग ढाई करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया .इधर झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के केंद्रीय महामंत्री डी सी गोहाई ने धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला मजदूरों की एकजुटता, संघर्ष और कानूनी अधिकारों की लड़ाई को मजबूती प्रदान करता है.
यूनियन के संयुक्त महासचिव कॉमरेड सागर बेसरा ने कहा कि ठेका मजदूर किसी भी उद्योग अथवा खनन परियोजना की उत्पादन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं. उनके श्रम का उचित मूल्य और वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना संबंधित नियोक्ता एवं ठेका प्रतिष्ठान की जिम्मेदारी है.
यूनियन उपाध्यक्ष बाबूलाल मुर्मू ने मांग की है कि न्यायालय के आदेश का बिना किसी अनावश्यक विलंब के पूर्ण रूप से अनुपालन किया जाए और 226 मजदूरों को न्यायालय द्वारा निर्धारित राशि का पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
ठेका मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई आगे जारी रहेगी - डी सी गुहाई
झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के केंद्रीय महासचिव डी सी गुहाई ने पूर्व यूसिल कर्मी सागर बेसरा, राजू क्यूंकल, ममता देवी , विद्या शर्मा , सुमन झा सहित यूसिल की विभिन्न खदानों एवं परियोजनाओं में कार्यरत मजदूरों के बर्खास्तगी , इंक्रीमेंट होल्ड ,वेतन, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, वैधानिक सुविधाओं, सेवा शर्तों एवं अन्य श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संगठन लगातार संघर्ष करता रहेगा.
उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला उन सभी श्रमिकों के लिए संदेश है कि अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संगठित एवं कानूनी संघर्ष के माध्यम से न्याय प्राप्त किया जा सकता है. बैठक में बाबुलाल मुर्मू, सुपाई सोरेन, ओराम माझी , दासो मुर्मू, गोविन्द मार्डी, गुड़रा टुडू, श्यामल कोड़ा कुशनू मार्डी, नंदी गुईया, मीनी भूमिज, सुखमति बेसरा राधे मार्डी,जासई सोरेन, संग्राम मुर्मू, मंगल हेम्ब्रम, शिबू सोरेन, भीम सोरेन, जदुनाथ हंसदा, सलखन टुडू, राजाराम हंसदा, उदय कुंकल, धीरेन सुंडी, तुलसी माझी, भागमत मुर्मू, प्रधान मार्डी, लाखन टुडू, होपोन बूढ़ीउली, कृष्णा बेसरा, प्रीतम टुडू, दुला सोरेन, सदन दिग्गी, गाजी मुर्मू, बबलु बूढ़ीउली, मुरली मनोहर महाकुड़, बनमली सोरेन, खेला टुडू, छोटराय सरदार, लोगेन हंसदा, मानसिंह सोरेन, मदन हंसदा, नरन चाकी, विनोद हेम्ब्रम, धानो मुर्मू, सुशांतो महतो, मंगल मार्डी आदि मजदूर उपस्थित थे.