जमीन अधिग्रहण

कांके में 2.98 एकड़ जमीन अधिग्रहण से मुक्त कराने की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा - प्रक्रिया पूरी हो चुकी है

कांके अंचल के नगड़ी गांव में 2.98 एकड़ जमीन को पुराने अधिग्रहण से बाहर करने और उसे मूल रैयतों को लौटाने की मांग को झारखंड हाईकोर्ट ने स्वीकार नहीं किया.

By : Ark Sahuliyar
कांके में 2.98 एकड़ जमीन अधिग्रहण से मुक्त कराने की मांग खारिज, हाईकोर्ट ने कहा - प्रक्रिया पूरी हो चुकी है

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
कांके अंचल के नगड़ी गांव में 2.98 एकड़ जमीन को पुराने अधिग्रहण से बाहर करने और उसे मूल रैयतों को लौटाने की मांग को झारखंड हाईकोर्ट ने स्वीकार नहीं किया. न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि संबंधित भूमि का अधिग्रहण काफी पहले कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा हो चुका था. मुआवजे से जुड़ी कार्रवाई भी पूरी की जा चुकी थी.

मामला करीब छह दशक पुराने भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं ने नगड़ी गांव के अलग-अलग प्लॉट की कुल 2.98 एकड़ जमीन पर अपना दावा करते हुए उसे अधिग्रहण से मुक्त करने की मांग की थी. रिकॉर्ड के अनुसार, बिरसा कृषि कॉलेज के लिए नगड़ी गांव की लगभग 202.07 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 1957-58 में शुरू हुई थी. इसी क्रम में भूमि अधिग्रहण वाद संख्या 21/1957-58 दर्ज किया गया था. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संबंधित जमीन उनके पूर्वजों के नाम दर्ज थी और परिवार का उस पर कब्जा रहा है. उन्होंने राजस्व रसीद जारी होने का भी हवाला दिया. उनका तर्क था कि जमीन का मूल उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं हुआ, इसलिए उसे अधिग्रहण से मुक्त कर वापस किया जाना चाहिए.

सरकार ने बताया- बहुत देर से आई याचिका
राज्य सरकार ने इस मांग का विरोध किया. सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और संबंधित भूमि के लिए अवॉर्ड भी पारित किया गया था. मुआवजे का भुगतान किए जाने की बात भी सरकार ने कही. सरकार ने याचिका दाखिल करने में हुई लंबी देरी पर भी सवाल उठाया. उसका कहना था कि इतने वर्षों बाद अधिग्रहण को चुनौती देने का कोई उचित आधार नहीं बनता.

जमीन का उपयोग दूसरे सार्वजनिक कामों में भी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह भी आया कि अधिग्रहित जमीन के कुछ हिस्से का उपयोग अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में हो चुका है. जमीन का एक हिस्सा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची को दिया गया है. वहीं, कुछ भूमि रांची रिंग रोड के निर्माण में भी इस्तेमाल हुई है. इससे संबंधित संस्थानों की ओर से अदालत को जमीन के वर्तमान उपयोग की जानकारी दी गई.

उत्तराधिकारी होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के दावे से जुड़े दस्तावेजों पर भी गौर किया. कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता खुद को मूल अवार्डियों का वैध कानूनी उत्तराधिकारी साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके. कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर माना कि जमीन का अधिग्रहण पुरानी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ था. ऐसे में सिर्फ इस आधार पर कि जमीन का उपयोग बाद में किसी अन्य सार्वजनिक उद्देश्य के लिए हुआ, अधिग्रहण को खत्म कर जमीन वापस करने का आदेश नहीं दिया जा सकता. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमीन को अधिग्रहण से मुक्त करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी.

यह भी पढ़ें- उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने किया ईवीएम वेयरहाउस का त्रैमासिक निरीक्षण

 

संबंधित सामग्री

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गांदके गांव में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है.

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त किए जाने के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट हैं.

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है.

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय तक संविदा पर काम करने वाले नौ कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है.

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

झारखंड हाईकोर्ट ने गैर-औपचारिक शिक्षा योजना में काम कर चुके 35 सुपरवाइजरों को झारखंड सरकार की नियमित सेवा में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है.