रिम्स

झारखंड में पहली बार! रिम्स में शुरू हुई गर्भ में पल रहे शिशु की आनुवांशिक जांच, जानिए फीस और अन्य जानकारी

रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में अब प्रसवपूर्व (प्रीनेटल) आनुवांशिक जांच शुरू हो गयी है.

By : Dipali Kumari
झारखंड में पहली बार! रिम्स में शुरू हुई गर्भ में पल रहे शिशु की आनुवांशिक जांच, जानिए फीस और अन्य जानकारी

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क: 
अब आप गर्भ में पल रहे शिशु में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्राफी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी समेत कई गंभीर आनुवांशिक बीमारियों का पता लगा सकते हैं. दरअसल राजधानी रांची के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में अब प्रसवपूर्व (प्रीनेटल) आनुवांशिक जांच शुरू हो गयी है. अब तक अस्पताल में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से संबंधित 26 प्रसवपूर्व आनुवांशिक परीक्षण किए जा चुके हैं. डॉ. किरण त्रिवेदी के साथ मिलकर झारखंड में पहली बार इस सुविधा की शुरुआत की गई है.

जांच के बाद रोका गया कई शिशुओं का जन्म 

इन जांचों और विशेषज्ञ परामर्श के आधार पर दो बीटा-थैलेसीमिया और दो सिकल सेल रोग से प्रभावित शिशुओं के जन्म को रोका जा चुका है. इसके अलावा पहली बार बीटा-कीटोथायोलेज की कमी (बीटा-कीटोथायोलेज डिफिशिएंसी) जैसे अत्यंत दुर्लभ आनुवांशिक रोग का भी सफल प्रसवपूर्व निदान किया गया. यह बीमारी एसीएटी-1 जीन में परिवर्तन के कारण होती है. समय पर पहचान और परामर्श से इस रोग से प्रभावित शिशु के जन्म को भी रोका गया. प्रसवपूर्व आनुवांशिक जांच से ऐसे दम्पतियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आनुवांशिक रोगों का इतिहास रहा है. 

कितने दिनों की गर्भावस्था में होगी जांच 

रिम्स में गर्भावस्था के 9 से 11 सप्ताह तथा 16 से 20 सप्ताह के बीच प्रसवपूर्व जांच की सुविधा उपलब्ध है. प्रीनेटल आनुवांशिक जांच के लिए गर्भ से सुरक्षित तरीके से नमूना लिया जाता है. इसके बाद डीएनए निकालकर पीसीआर, सैंगर सीक्वेंसिंग और एमएलपीए जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से आनुवांशिक परीक्षण किया जाता है. जांच रिपोर्ट के आधार पर दंपति को विशेषज्ञ आनुवांशिक परामर्श दिया जाता है. पूरी प्रक्रिया में सामान्यत 1-2 सप्ताह का समय लगता है.

निजी लैब की तुलना में बेहद कम खर्च

रिम्स में इस जांच की लागत मात्र 3,500 रुपये है, जबकि निजी प्रयोगशालाओं में इसी जांच के लिए 15 हजार रुपये या उससे अधिक खर्च करना पड़ता है. विभाग के अनुसार डीबीटी-निदान केंद्र परियोजना के तहत अगले एक वर्ष तक यह जांच निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी.

इसे भी पढ़ें: क्या रांची की लड़की इंटरनेशनल स्तर पर कर रही ड्रग्स सप्लाई? युवती जांच एजेंसियों के रडार पर
 

संबंधित सामग्री

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गांदके गांव में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है.

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त किए जाने के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट हैं.

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है.

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय तक संविदा पर काम करने वाले नौ कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है.

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

झारखंड हाईकोर्ट ने गैर-औपचारिक शिक्षा योजना में काम कर चुके 35 सुपरवाइजरों को झारखंड सरकार की नियमित सेवा में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है.