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कांके विधानसभा चुनाव मामले में डॉ. जीतू चरण राम की चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

दोनों पक्षों के आधार पर कोर्ट ने इश्यू किया फ्रेम

By : News11 Bharat , Pramod Kumar
कांके विधानसभा चुनाव मामले में डॉ. जीतू चरण राम की चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क:

झारखंड हाई कोर्ट में कांके विधानसभा क्षेत्र चुनाव को लेकर डॉ जीतू चरण राम की ओर से दाखिल चुनाव याचिका पर सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के प्रस्तावित बिंदुओं के आधार पर इश्यू फ्रेम कर दिए हैं. इश्यू फ्रेम होने के बाद कोर्ट के निर्देश पर याचिकाकर्ता डॉ. जित्तू चरण राम की ओर से गवाहों की सूची दाखिल की गई. याचिकाकर्ता पक्ष ने कुल 13 निजी गवाहों, जिनमें खुद याचिकाकर्ता, उनके चुनाव एजेंट और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं, उनकी सूची सौंपी है. इसके अलावा 7 सरकारी अधिकारियों, जिनमें जिला निर्वाचन पदाधिकारी (डीसी), रिटर्निंग ऑफिसर और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर को भी गवाह बनाया गया है. ये सभी दस्तावेजों के संरक्षक के रूप में कोर्ट के समक्ष पेश किए जाएंगे.

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों को पदनाम के आधार पर गवाह बनाया गया है, उनके पूरे नाम, पेरेंटेज और पते की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि उन्हें समन जारी कर अदालत में बुलाया जा सके. मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है.

क्या है पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा मामला चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, खासकर EVM की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों से जुड़ा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि बुड़मू क्षेत्र के 18 EVM मशीनों को मतदान के बाद निर्धारित नियमों के तहत स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें कथित तौर पर एक अज्ञात स्थान पर रखा गया, जहां न CCTV की निगरानी थी और न ही प्रत्याशियों के एजेंट मौजूद थे.

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदान समाप्त होते ही EVM को पुलिस और प्रत्याशियों के एजेंटों की निगरानी में स्ट्रॉन्ग रूम में रखना अनिवार्य होता है. ऐसे में इन आरोपों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. खास बात यह है कि इस चुनाव में जीत-हार का अंतर हजार वोट से भी कम बताया गया है, जिससे इन 18 EVM की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.

याचिकाकर्ता ने सहायक निर्वाचन पदाधिकारी, चुनाव आयोग और विजेता प्रत्याशी सुरेश बैठा की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए चुनाव परिणाम रद्द करने, खुद को निर्वाचित घोषित करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

यह भी पढ़ें: एसडीएम ने मतदान केंन्द्रों का किया निरीक्षण, मतदान केंद्रों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं व मतदाता सूची संबंधित कार्यों का जायजा लिया

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