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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित माध्यमिक आचार्य भर्ती ऑनलाइन परीक्षा मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य के मुख्य सचिव को तत्काल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ CID में FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और स्वतंत्र आपराधिक जांच जरूरी है. साथ ही कहा कि भर्ती के तहत की जाने वाली नियुक्तियां CID जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी.
अदालत ने फैसला रखा था सुरक्षित
इस मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश दीपक रोशन ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से कई अहम सवाल पूछे थे. कोर्ट ने पूछा था कि कथित हैकिंग की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से क्यों नहीं कराई गई, केवल परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय क्यों लिया गया, कथित हैकिंग वाले परीक्षा केंद्रों पर क्या कार्रवाई हुई और गड़बड़ी कुछ कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित थी या पूरा परीक्षा केंद्र प्रभावित था. इन सवालों पर JSSC की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका था. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.
केवल परीक्षा कराने वाली एजेंसी की रिपोर्ट पर भरोसा करना उचित नहीं: हाई कोर्ट
याचिका में JSSC के पुनर्परीक्षा कराने के फैसले को चुनौती देते हुए स्वतंत्र जांच, निर्दोष अभ्यर्थियों का मूल परिणाम जारी करने तथा दोषी अभ्यर्थियों, परीक्षा एजेंसी, संबंधित अधिकारियों और परीक्षा केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि केवल परीक्षा कराने वाली एजेंसी की रिपोर्ट पर भरोसा करना उचित नहीं है, क्योंकि कोई भी संस्था अपने ही मामले में स्वयं न्यायाधीश नहीं बन सकती. अदालत ने कहा कि अब तक न तो किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई गई और न ही Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2023 के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई, जबकि कानून इसकी व्यवस्था करता है.
भर्ती प्रक्रिया रोकना न्यायहित में नहीं होगा
कोर्ट ने पूरे भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने या पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि अभ्यर्थी पहले ही पुनर्परीक्षा में शामिल हो चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर भर्ती प्रक्रिया रोकना न्यायहित में नहीं होगा. हालांकि वास्तविक दोषियों की पहचान के लिए निष्पक्ष आपराधिक जांच अनिवार्य है.
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी पूछा कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटर टर्मिनल में हुई, केंद्रीय सर्वर में हुई या परीक्षा एजेंसी के सॉफ्टवेयर से समझौता हुआ. साथ ही यह भी सवाल उठाया कि जब एजेंसी स्वयं अनधिकृत गतिविधियों की बात स्वीकार कर रही है तो केवल उसकी रिपोर्ट के आधार पर 2,819 अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई कैसे की जा सकती है. इन प्रश्नों का भी आयोग की ओर से संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जा सका.
भर्ती प्रक्रिया रोकना न्यायहित में नहीं होगा
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि CID निष्पक्ष और शीघ्र जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान करे और कानून के अनुसार उनके खिलाफ अभियोजन चलाए. हाई कोर्ट ने JSSC को जांच में पूरा सहयोग करने, दोनों चरणों की परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा परीक्षा एजेंसी और परीक्षा केंद्रों से भी सहयोग सुनिश्चित करने का आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि 2,819 प्रभावित अभ्यर्थियों के पेपर-2 पुनर्परीक्षा के अंक बिना किसी पूर्वाग्रह के जारी किए जाएं, ताकि यदि जांच में कोई अभ्यर्थी निर्दोष पाया जाता है तो उसे अनावश्यक नुकसान न उठाना पड़े. हालांकि इन अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम और नियुक्तियां आपराधिक जांच के निष्कर्ष के अधीन रहेंगी.
हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने, निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने और वास्तविक दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है. इससे भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का विश्वास भी मजबूत होगा. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन, अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता रूपेश कुमार ने पक्ष रखा. JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा.
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