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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में बड़ी राहत देते हुए निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें आरोपी की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी गई थी. न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने मामले को वापस संबंधित अदालत में भेजते हुए दोनों पक्षों को सुनने और नए सिरे से कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है.
2015 में दर्ज हुआ था मामला
मामला जगन्नाथपुर थाना कांड संख्या 287/2015 और जीआर केस संख्या 5255/2015 से जुड़ा है. आरोपी श्याम बरन दास उर्फ श्यामल बरन दास पेशे से अधिवक्ता हैं. उनके खिलाफ IPC की धारा 354A के तहत मामला दर्ज किया गया था.
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह एक मामले के सिलसिले में आरोपी अधिवक्ता से मिलने उनके घर गई थी. 20 अगस्त 2015 को शाम करीब 5:15 बजे मुलाकात तय हुई थी. आरोप है कि घर पहुंचने के बाद अधिवक्ता ने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया और गलत नीयत से उसका हाथ खींचकर बिस्तर की ओर ले गए तथा कपड़े उतारने का प्रयास किया. महिला वहां से भाग निकली और महिला हेल्पलाइन से संपर्क किया. इसके बाद 21 अगस्त को महिला थाना पहुंची और सलाह के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई.
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर धारा 354A के तहत प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए संज्ञान लिया. आरोपी ने Cr.P.C. की धारा 239 के तहत डिस्चार्ज के लिए आवेदन दिया था, जिसे 21 अप्रैल 2022 को निचली अदालत ने खारिज कर दिया. इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में पाई बड़ी कमी
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि निचली अदालत ने डिस्चार्ज आवेदन खारिज करते समय सिर्फ यह कहा कि धारा 354A के तहत पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है. आदेश में ऐसा कोई ठोस आपत्तिजनक साक्ष्य या सामग्री नहीं बताई गई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता हो. अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़िता को अवसर दिए जाने के बावजूद उसकी ओर से कोई लिखित आपत्ति दाखिल नहीं की गई थी. हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत का आदेश कारणरहित और गैर-स्पीकिंग आदेश है.
अब नए सिरे से होगी डिस्चार्ज आवेदन पर सुनवाई
हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल 2022 के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया. साथ ही मामले को संबंधित अदालत में वापस भेजते हुए दोनों पक्षों को डिस्चार्ज आवेदन पर सुनवाई का पूरा अवसर देने का निर्देश दिया है. अदालत अब उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद नया और कारणयुक्त आदेश पारित करेगी. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत नया फैसला सुनाते समय हाईकोर्ट की वर्तमान टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगी.
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