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रांची/डेस्क: रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने चार साल छह महीने की बच्ची की अंतरिम कस्टडी से जुड़े मामले में बड़ा आदेश दिया है. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंडपीठ ने हजारीबाग फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बच्ची की अंतरिम कस्टडी मां को देने से इनकार किया गया था. हाईकोर्ट ने अब बच्ची की अंतरिम कस्टडी उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया है. यह व्यवस्था मुख्य कस्टडी मामले का फैसला होने तक लागू रहेगी.
मां की कस्टडी की मांग पर हाईकोर्ट ने बदला फैसला
मां ने हजारीबाग फैमिली कोर्ट के 27 नवंबर 2025 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. फैमिली कोर्ट ने उनकी चार साल से कम उम्र की बेटी एकांशी शर्मा की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार करते हुए उन्हें केवल मिलने का अधिकार दिया था.
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि फैमिली कोर्ट ने मां की ओर से मांगी गई अंतरिम कस्टडी के सवाल पर कानून के मुताबिक फैसला नहीं किया. इसके बजाय अदालत ने मुख्य रूप से दोनों माता-पिता के प्यार और बच्चे से मिलने के अधिकार को देखते हुए विजिटेशन की व्यवस्था कर दी थी.
हाईकोर्ट ने कहा- बच्चे का हित सबसे महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने साफ किया कि बच्चे की कस्टडी के मामले में सबसे अहम बात माता-पिता का अधिकार नहीं, बल्कि बच्चे का कल्याण और उसका हित है. अदालत ने यह भी कहा कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे की कस्टडी सामान्य तौर पर मां के पास रहने का प्रावधान है.
मौजूदा मामले में बच्ची की उम्र करीब चार साल छह महीने है. कोर्ट ने माना कि इतनी कम उम्र में बच्ची को मां के प्यार और देखभाल की विशेष जरूरत है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अंतरिम कस्टडी मां को देने का आदेश दिया.
हाईकोर्ट ने पिता को बच्ची से मिलने का अधिकार भी दिया है. आदेश के मुताबिक पिता हर सप्ताहांत सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बच्ची से मिल सकते हैं. मुलाकात ऐसी जगह होगी, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों या फैमिली कोर्ट जगह तय करे.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुलाकात की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे बच्ची की पढ़ाई प्रभावित न हो. परिस्थितियों को देखते हुए फैमिली कोर्ट आगे चलकर मुलाकात की शर्तों में बदलाव भी कर सकता है.
एक सप्ताह के भीतर मां को सौंपनी होगी बच्ची
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह अपने आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जरूरी कदम उठाए. बच्ची एक सप्ताह के भीतर डॉ. संगीता विश्वकर्मा को अंतरिम कस्टडी में सौंपने का निर्देश दिया गया है.
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल अंतरिम कस्टडी तक सीमित है. बच्ची की स्थायी कस्टडी से जुड़ा मुख्य मामला हजारीबाग फैमिली कोर्ट में लंबित रहेगा और उसका फैसला इस आदेश से प्रभावित नहीं होगा. फैमिली कोर्ट को मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने और अनावश्यक तारीखें नहीं देने का निर्देश दिया गया है.
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