रोहन निषाद/न्यूज़ 11 भारत
चाईबासा/डेस्क: सदर चाईबासा अंचल अंतर्गत एमडीआर-177 सड़क तांबो चौक से नया समाहरणालय के किनारे वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को अचानक दुकान हटाने का नोटिस दिए जाने के विरोध में शुक्रवार को स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों ने अंचल अधिकारी को ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन में कहा गया कि नोटिस से विशेषकर गरीब और असहाय आदिवासी व्यापारी प्रभावित होंगे. संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) और 21 के तहत आजीविका का अधिकार तथा Street Vendors Act 2014 के तहत स्ट्रीट दुकानदारों की रक्षा का प्रावधान है. क्षेत्र पाँचवी अनुसूची में आने के कारण यहाँ मुण्डा-मानकी की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है. पेसा कानून की भावना के अनुसार कार्रवाई से पूर्व ग्राम सभा और पारंपरिक प्रतिनिधियों से सुनवाई आवश्यक है.
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि एनएच-75ई और अन्य मुख्य मार्गों पर वर्षों से हो रहे अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि एक विशेष क्षेत्र को निशाना बनाया जा रहा है.
मुख्य मांगें: नोटिस तुरंत निरस्त हो, ग्राम सभा व मुण्डा-मानकी के साथ संयुक्त बैठक हो, सभी मार्गों पर अतिक्रमण की निष्पक्ष जांच हो और आदिवासी स्वशासन का सम्मान हो.अंचल अधिकारी की अनुपस्थिति में ज्ञापन अंचल निरीक्षक को सौंपा गया.
प्रतिनिधिमंडल में रेयांस सामड, महेंद्र जामुदा, भगवान सवैया, मालिना सुंडी, लक्ष्मी जामुदा, अल्बिन एक्का, सुखलाल पूरती, सुरेश सिंकू, अमन सवैया, सतेन्द्र सोय, सुरेन्द्र मुंडरी, नमन गोप, नानू दास, चंद्रमोहन तांती, बुधराम गोप, अनिल जमुदा, हरीश बोदरा, शेखर गगराई, तन्मय नायक, बाबूराम सवैया, लाल सिंह बिरुवा, प्रकाश पूरती, मोती हेंब्रम, रीना बिरुवा, अनिता पिंगुवा, घनश्याम पूरती, मनीष गोंड, मैनोनी देवी तथा काफी संख्या में दुकानदार उपस्थित थे.
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