पंकज कुमार
घाघरा/डेस्क: घाघरा प्रखंड के अरंगी पंचायत अंतर्गत खम्भिया गांव में निर्धारित स्थल पर पुलिया निर्माण नहीं कर दूसरे स्थान पर निर्माण कराए जाने और योजना की राशि निकासी से संबंधित खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आ चुके है. सोमवार को जिला पंचायती राज विभाग के डीपीएम सतीश कुमार अपनी टीम के साथ खम्भिया गांव पहुंचे और पूरे मामले की स्थल जांच की.
जांच के दौरान अधिकारियों ने उस स्थल का निरीक्षण किया, जहां योजना के तहत पुलिया का निर्माण किया जाना था. इसके बाद उस स्थान का भी जायजा लिया गया, जहां वर्तमान में पुलिया का निर्माण कराया गया है. अधिकारियों ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों से भी मामले की जानकारी ली.
निर्धारित स्थल छोड़कर दूसरे स्थान पर कराया गया निर्माण
जांच के दौरान प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई कि योजना जिस स्थान के लिए स्वीकृत थी, वहां पुलिया का निर्माण नहीं कराया गया है. इसके बजाय दूसरे स्थान पर पुलिया का निर्माण कराया गया है. ग्रामीणों ने भी अधिकारियों को बताया कि स्वीकृत स्थल पर पुल नहीं बनाया गया और दूसरे स्थान पर निर्माण कर दिया गया.
बताया जाता है कि योजना स्थल में बदलाव करने से पहले ग्राम सभा आयोजित कर नए स्थल पर कार्य की स्वीकृति लेना तथा जिला पंचायती राज पदाधिकारी से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है. आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना ही योजना का स्थल बदलकर कार्य करा दिया गया.
पंचायत कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
योजना स्थल बदलने के मामले में पंचायत सचिव, कनीय अभियंता जीवन एक्का और मुखिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि संबंधित प्रक्रिया पूरी किए बिना ही योजना को दूसरे स्थान पर कराया गया। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविकता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी.
न्यूज 11 भारत में खबर प्रकाशित होते ही पंचायत में मचा हड़कंप
न्यूज 11 भारत में खबर प्रकाशित होने के बाद पंचायत स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है. ग्रामीणों के अनुसार, खबर सामने आने के बाद लाभुक समिति के अध्यक्ष और सचिव द्वारा योजना को सही साबित करने के उद्देश्य से गांव में लोगों से हस्ताक्षर कराए जाने की बात सामने आई है. वहीं पंचायत से जुड़े कर्मियों द्वारा योजना को नियम संगत साबित करने का प्रयास किए जाने की भी चर्चा है.
हर पहलू की हो रही जांच,डीपीएम सतीश कुमार
मामले में डीपीएम सतीश कुमार ने बताया कि जिला पंचायती राज पदाधिकारी के आदेश पर जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट लिखित रूप से जिला पंचायती राज पदाधिकारी को सौंपी जाएगी. इसके बाद नियम संगत कार्रवाई की जाएगी.
अब ग्रामीणों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या योजना स्थल बदलने और निर्माण प्रक्रिया में बरती गई कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय होगी, या फिर संबंधित लोगों द्वारा योजना को सही साबित करने में सफलता मिल जाएगी? जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का सच सामने आएगा.
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