विधिक शिविर

डालसा और स्थाई लोक अदालत के द्वारा तुईबीर पंचायत भवन में विधिक जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन

उपस्थित लोगों को कई महत्वपूर्ण कानूनी संबंधित बातों से अवगत कराया गया

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
डालसा और स्थाई लोक अदालत के द्वारा तुईबीर पंचायत भवन में विधिक जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन

रोहन निषाद/न्यूज़ 11 भारत 

चाईबासा/डेस्क: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा एवं स्थाई लोक अदालत के संयुक्त तत्वाधान एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर एवं प्राधिकार के सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में दिनांक 30-07-26 को तुईबीर पंचायत भवन में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन पीएलवी हेमराज निषाद पीएलवी रत्ना चक्रवर्ती स्थाई लोक अदालत के सदस्य सुभद्रा बेहरा एवं पेशकार शशि सिंहा के द्वारा किया गया जिसमें उपस्थित लोगों को कई महत्वपूर्ण कानूनी संबंधित बातों से अवगत कराया ताकि वह अपने हक और अधिकार के प्रति जागरूक हो सके स्थाई लोक अदालत के बारे में जानकारी दिया गया की चाईबासा व्यवहार न्यायालय के परिसर में स्थाई लोक अदालत का ऑफिस है आप वहां जाकर अपने समस्याओं को एक सादे कागज में लिखकर आवेदन दे सकते हैं जिस पर निशुल्क कार्रवाई करते हुए इसका निष्पादन किया जाता है.

बिजली पानी सड़क ट्रांसफार्मर आदि बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं को आप स्थाई लोक अदालत के माध्यम से निष्पादन करवा सकते हैं. बाल विवाह और डायन प्रथा दोनों ही समाज में गंभीर कुरीतियां हैं जो बच्चों और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं. बाल विवाह बच्चों को उनकी शिक्षा और विकास से वंचित करता है, जबकि डायन प्रथा के कारण महिलाओं को उत्पीड़न और हिंसा का सामना करना पड़ता है. बाल विवाह एक ऐसी प्रथा है जिसमें बच्चों को उनकी उचित उम्र लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष से पहले ही विवाह कर दिया जाता है. यह एक कानूनी और सामाजिक अपराध है जो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास को प्रभावित करता है.

बाल विवाह के कारण लड़कियों की शादी की उम्र कम हो जाती है, जिससे उन्हें गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है. महिलाओं को डायन या चुड़ैल के रूप में देखा जाता है और उनके साथ उत्पीड़न और हिंसा की जाती है. डायन प्रथा किसी स्वार्थ से प्रेरित होता है उसके संपत्ति को हड़पने अपना वर्चस्व फैलाने के लिए इस तरह के अंधविश्वास को फैलाया जाता है. बाल विवाह और डायन प्रथा की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता पैदा करने और कानूनी प्रावधानों को लागू करने की आवश्यकता है. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 जैसे कानून इस प्रथा को रोकने में मदद करते हैं. साइबर क्राइम के बारे में बताया गया की जागरूकता से ही इससे बचा जा सकता है इसीलिए जागरूक रहें सतर्क रहें और सुरक्षित रहें फोन पर कभी भी किसी को ओटीपी न बताएं अनजान लिंक पर टच न करें किसी के प्रलोभन या लालच में ना आए साइबर फ्रॉड होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाये पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एंबुलेंस हेल्पलाइन नंबर 108 अग्निशमन हेल्पलाइन नंबर 101 के बारे में जानकारी दिया गया. इस विधिक जागरूकता शिविर में काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.

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