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रांची/डेस्क: झारखंड हाई कोर्ट ने दुमका के कोयला कारोबारी अमर मंडल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोई भी राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने आरोपी द्वारा दायर क्रिमिनल रिट याचिका को खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उनके खिलाफ की जा रही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
क्या था याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क?
अमर मंडल के वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी थी कि ED ने जिस बुनियादी केस (Predicate Offence) को आधार बनाकर यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला (ECIR/RNZO/08/2023) दर्ज किया था, उसमें गोड्डा की निचली अदालत पहले ही अपना फैसला सुना चुकी है. गोड्डा सिविल कोर्ट ने 10 फरवरी 2026 को ही उन्हें पोड़ैयाहाट थाना कांड संख्या 07/2019 (G.R. Case 1125/2022) के सभी आरोपों से बरी (Acquit) कर दिया है. याचिका में कहा गया था कि जब मुख्य केस में ही दोषसिद्धि नहीं हुई, तो ED की आगे की कार्रवाई स्वतः निरस्त होनी चाहिए.
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ में हुई, जहां कोर्ट ने पूर्व में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने ED के इस तर्क को स्वीकार किया कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच एक स्वतंत्र प्रकृति का अपराध है. अदालत ने स्पष्ट किया कि मूल पुलिस केस (अवैध कोयला खनन और परिवहन) में बरी होने मात्र से ED द्वारा दर्ज की गई ECIR की कार्यवाही स्वतः समाप्त नहीं की जा सकती.
मामले की पृष्ठभूमि: छापों से दहला था इलाका
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में ED की टीम ने केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF) के साथ दुमका के जामा थाना क्षेत्र के सेजाकोड़ा गांव स्थित अमर मंडल के आवास पर 40 से अधिक ठिकानों के साथ एक बड़ा राष्ट्रव्यापी छापा मारा था. जांच एजेंसियों का मानना है कि अमर मंडल इलाके में अवैध कोयला खनन और परिवहन नेटवर्क के एक मुख्य सूत्रधार के रूप में काम कर रहे थे. इस छापेमारी के दौरान डिजिटल दस्तावेज, वित्तीय कागजात और करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति की कड़ियों को खंगाला गया था.
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