MMDR संशोधन बिल 2026

MMDR संशोधन बिल 2026: सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; बोले- राजस्व घटा तो योजनाओं पर पड़ेगा असर

सीएम ने आशंका जताई है कि यदि खनिजों से राजस्व जुटाने की राज्य की शक्ति सीमित या समाप्त होती है, तो झारखंड को हर साल हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ सकता है.

By : Dipali Kumari
MMDR संशोधन बिल 2026: सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; बोले- राजस्व घटा तो योजनाओं पर पड़ेगा असर

न्यूज़11 भारत 
राँची/डेस्क: 
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि इस संशोधन से झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों को राजस्व का बड़ा नुकसान हो सकता है. मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से इस मामले में राज्य की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है.

मुख्यमंत्री के पत्र के अनुसार, झारखंड के गैर-कर राजस्व का बड़ा हिस्सा खनन से आता है.  झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2024-25 में राज्य को खनन क्षेत्र से करीब 1,379 करोड़ रुपये, जबकि 2025-26 में करीब 7,488 करोड़ रुपये मिले. वहीं वर्तमान वर्ष 2026-27 में करीब 13,215 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है. मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन से मिलने वाला यह पैसा राज्य की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. 

मंईयां सम्मान समेत कई योजनाओं पर पड़ेगा असर 

इस पत्र में मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का भी उल्लेख किया है. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 50 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है. इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना से जुड़ी अन्य योजनाएं भी राज्य की वित्तीय क्षमता पर ही निर्भर हैं.

सीएम हेमंत सोरेन ने आशंका जताई है कि यदि खनिजों से राजस्व जुटाने की राज्य की शक्ति सीमित या समाप्त होती है, तो झारखंड को हर साल हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ सकता है. इसका सीधा असर विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए किए जाने वाले कार्यों पर पड़ सकता है.  

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के आदिवासी और खनन प्रभावित इलाकों के लोगों ने विकास की बड़ी कीमत चुकाई है. उन्हें विस्थापन, जमीन छिनने, प्रदूषण और पर्यावरण को हुए नुकसान जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की खनिज संपदा से होने वाली कमाई का उचित हिस्सा उन इलाकों और लोगों के विकास और कल्याण पर ही खर्च होना चाहिए, जहां से ये खनिज मिलते हैं.

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