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रांची/डेस्क: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मनुस्मृति और ब्रिटिश शासनकाल से जुड़े इतिहास का हवाला दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि 27 मार्च 1775 को वॉरेन हेस्टिंग्स के समय 11 पंडितों और विद्वानों की एक समिति गठित की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत में उपलब्ध संस्कृत और पाली ग्रंथों का अध्ययन और अनुवाद करना था.
निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में दावा किया कि समिति की रिपोर्ट और अनुवाद 1777 में गवर्नर जनरल को सौंपे गए थे. उनके अनुसार, रिपोर्ट में मनुस्मृति के कुछ श्लोकों को सही और कुछ को गलत बताया गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रंथ में कालखंडों को लेकर कल्पित विवरण हैं और बाद के विद्वानों द्वारा अपने शब्द जोड़े जाने की बात कही गई थी.
भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को सनातन धर्म के अलावा अन्य धार्मिक ग्रंथों के मामले में भी इसी दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए. उन्होंने अपने पोस्ट के अंत में कहा कि यह देश हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों समेत सभी का है. निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय आया है जब मनुस्मृति और धार्मिक ग्रंथों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है.
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