प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क: बरवाडीह प्रखंड के गढ़वाटांड़ निवासी समाजसेवी रवींद्र कुमार (पुटून) ने एक बार फिर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अपना 9वां रक्तदान कर एक महिला की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई. उनके इस सराहनीय कार्य की क्षेत्र में खूब प्रशंसा हो रही है. जानकारी के अनुसार बरवाडीह के मंगरा निवासी जगदंबा देवी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. बीमारी के कारण उनके शरीर में लगातार रक्त की कमी बनी रहती है, जिसके चलते उन्हें समय-समय पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है.
इस बार भी उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी और परिजन पिछले चार दिनों से आवश्यक रक्त की तलाश में भटक रहे थे, लेकिन कहीं से भी रक्त की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी. इसी दौरान परिजनों ने गढ़वाटांड़ निवासी रवींद्र कुमार से संपर्क किया. सूचना मिलते ही रवींद्र बिना किसी देर किए डालटनगंज स्थित एमएमसीएच अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे और स्वेच्छा से रक्तदान किया. उनके द्वारा दिए गए रक्त को तत्काल अस्पताल में भर्ती जगदंबा देवी को चढ़ाया गया, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ और परिजनों ने राहत की सांस ली.
रक्तदान के बाद रवींद्र कुमार ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील की. उन्होंने कहा कि रक्तदान महादान है. यदि हमारे एक यूनिट रक्त से किसी जरूरतमंद की जान बच सकती है, तो इससे बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं हो सकता. हर स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान अवश्य करना चाहिए. इससे किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि नियमित अंतराल पर रक्तदान करना स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है. रवींद्र कुमार ने बताया कि यह उनका 9वां रक्तदान है. उन्होंने कहा कि वे किसी विशेष अवसर या बुलावे का इंतजार नहीं करते, बल्कि जैसे ही किसी जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता की जानकारी मिलती है, वे तुरंत मदद के लिए आगे बढ़ जाते हैं. उन्होंने कहा, मुझे दूसरों की जिंदगी की परवाह है और इस बात पर गर्व है कि मैं किसी के जीवन को बचाने में योगदान दे पाता हूं.
रक्तदान को मैंने अपने जीवन की आदत बना लिया है. न मुझे किसी प्रकार का डर लगता है और न ही मैं कोई बहाना बनाता हूं. रवींद्र कुमार के इस मानवीय कार्य की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की है. लोगों का कहना है कि समाज में ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं. उनका यह कार्य न केवल एक महिला के लिए जीवनदान साबित हुआ, बल्कि समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को प्रेरित करने वाला भी है.
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