मुमताज अहमद/न्यूज़11 भारत
खलारी/डेस्क: खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के उद्देश्य से गठित जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के माध्यम से करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की जाती हैं. रांची जिले में इस फंड के अध्यक्ष उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री हैं. लेकिन खलारी कोयलांचल में डीएमएफटी मद से कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
ताजा मामला खलारी प्रखंड की हुटाप पंचायत का है, जहां बाजारटांड़ स्थित इस्लामनगर मदरसा से बाजारटांड़ चौक तक पीसीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है. इस सड़क का शिलान्यास कांके विधायक सुरेश बैठा द्वारा किया गया था. निर्माण कार्य जारी है, लेकिन ग्रामीणों ने इसकी गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि नई पीसीसी सड़क का निर्माण पुराने जर्जर सड़क के ऊपर ही किया जा रहा है. उनका आरोप है कि सड़क की निर्धारित मोटाई नहीं रखी जा रही है और केवल ग्रेडिंग कर निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है. कई बार शिकायत करने के बावजूद निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे लोगों ने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया.
सबसे गंभीर आरोप तब सामने आया जब निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा, "कोई माई का लाल ईमानदारी से काम नहीं करता. अगर पूरी ईमानदारी से काम करेंगे तो बिल के साथ इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों को चढ़ावा कैसे देंगे." यदि यह कथन सही है तो यह निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है और इसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक हो जाती है.
इस पूरे मामले के बीच एक और बड़ा सवाल डीएमएफटी योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएमएफटी मद से निर्मित किसी भी योजना के शिलापट्ट पर प्रकल्पित राशि (स्वीकृत लागत) अंकित नहीं की जाती, जबकि प्रखंड, जिला परिषद अथवा अन्य सरकारी योजनाओं में निर्माण कार्य की लागत, योजना का विवरण और संबंधित अभियंता का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज रहता है.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर डीएमएफटी की योजनाओं में प्रकल्पित राशि और संबंधित अभियंता का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हो रहा है तो लागत और तकनीकी जानकारी छिपाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? इससे आम लोगों के लिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की निगरानी करना लगभग असंभव हो जाता है.
वहीं, शिलान्यास पट्ट पर अंकित प्रखंड प्रतिनिधि की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की कभी समीक्षा की है या नहीं. हालांकि, संबंधित संवेदक (ठेकेदार) ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सड़क का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) और प्रकल्पित राशि के अनुरूप किया जा रहा है तथा कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार ही हो रहा है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो डीएमएफटी के अध्यक्ष एवं रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री क्या इस सड़क निर्माण की तकनीकी जांच कराएंगे? क्या प्रकल्पित राशि, तकनीकी स्वीकृति और निर्माण गुणवत्ता को सार्वजनिक किया जाएगा? यदि कथित भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल संवेदक, अभियंता और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
डीएमएफटी का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास करना है, लेकिन यदि योजनाओं में पारदर्शिता का अभाव और गुणवत्ता पर सवाल लगातार उठते रहे, तो इस फंड के उद्देश्य और उसकी कार्यप्रणाली दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है.