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रांची/डेस्क: गिरिडीह के चर्चित आरजेडी नेता कैलाश यादव हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मुखिया सुखदेव राय और उनके दो बेटों राजेश राय व विक्की राय को झारखंड हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है. हाईकोर्ट ने तीनों की जेल से बाहर आने और सजा पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है. न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद तीनों की अर्जियां खारिज कर दीं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर चुका है, जिसके तहत तीनों को पहले राहत मिली थी.
क्या है पूरा मामला?
मामला 25 अगस्त 2020 की रात का है. आरोप के मुताबिक, कैलाश यादव अपने साथी इंद्रलाल वर्मा के साथ बेंगाबाद थाने से लौट रहे थे. दोनों ने वहां सुखदेव राय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप है कि चमारटोली दुर्गा मंडप और आंगनबाड़ी केंद्र के पास सुखदेव राय, उनके बेटे राजेश राय और विक्की राय समेत कई लोग पहले से घात लगाकर बैठे थे. उनके पास लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे. बताया गया कि कैलाश यादव और इंद्रलाल वर्मा जैसे ही वहां पहुंचे, उनकी मोटरसाइकिल के आगे के पहिए में लोहे की रॉड डाल दी गई. इसके बाद दोनों पर हमला कर दिया गया. हमले में इंद्रलाल वर्मा गंभीर रूप से घायल हुए और उनके दोनों पैर तथा दाहिना हाथ टूट गया. वहीं, कैलाश यादव को बुरी तरह पीटा गया. आरोप है कि उन्हें घसीटकर बांस की झाड़ियों में फेंक दिया गया. इलाज के लिए धनबाद ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना के बाद बेंगाबाद थाने में मामला दर्ज किया गया था.
निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
इस मामले की सुनवाई गिरिडीह की अदालत में हुई. अदालत ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 6 जनवरी 2024 को सुखदेव राय, राजेश राय और विक्की राय समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था. सुखदेव राय और उनके दोनों बेटों को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. साथ ही प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट का रुख किया और अपनी सजा पर रोक लगाने के साथ जमानत की मांग की.
पहले हाईकोर्ट से मिली थी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया था रद्द
मामले में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने मई-जून 2025 में तीनों को राहत देते हुए उनकी सजा पर रोक लगा दी थी और उन्हें जमानत दे दी थी. इसके खिलाफ मृतक कैलाश यादव के भाई छोटूलाल यादव सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को 24 घंटे के भीतर जेल में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. इसके बाद सुखदेव राय और विक्की राय ने 11 नवंबर 2025 को, जबकि राजेश राय ने 12 नवंबर 2025 को गिरिडीह जेल में आत्मसमर्पण किया था.
नए सिरे से जमानत की मांग भी खारिज
जेल जाने के बाद तीनों ने एक बार फिर हाईकोर्ट में राहत की मांग की. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मामले में लगाए गए आरोपों और मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए. वहीं, सरकार और मृतक के भाई की ओर से इन अर्जियों का विरोध किया गया. हाईकोर्ट ने मामले में गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए तीनों को राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने माना कि मामले में घायल प्रत्यक्षदर्शी इंद्रलाल वर्मा और शिकायतकर्ता छोटूलाल यादव के बयानों में आरोपियों की भूमिका सामने आती है. अदालत ने तीनों की जमानत और सजा पर रोक की अर्जियां खारिज कर दीं. अब सुखदेव राय, राजेश राय और विक्की राय को जेल में रहकर हाईकोर्ट में लंबित अपनी अपील पर अंतिम फैसले का इंतजार करना होगा.