आदिवासी दिवस

राजनगर: आदिवासी दिवस पर विशेष कार्यक्रम, दिखा आदिवासी सभ्यता और संस्कृति का जीवंत स्वरूप

कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा इस दौरान आदिवासी सभ्यता और संस्कृति का जीवंत स्वरूप देखने को मिला.

By : Dipali Kumari
राजनगर: आदिवासी दिवस पर विशेष कार्यक्रम, दिखा आदिवासी सभ्यता और संस्कृति का जीवंत स्वरूप

मधु सुदन/न्यूज11 भारत 
सरायकेला/डेस्क:
जिले के राजनगर प्रखंड स्थित बेसिक स्कूल मैदान में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम सांसद जोबा माझी शामिल हुईं. वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में झामुमो नेता एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर केपी सोरेन, झामुमो केंद्रीय सदस्य कृष्णा बास्के, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष भुगलू सोरेन और दुर्गा लाल मुर्मू मौजूद रहे.

कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा इस दौरान आदिवासी सभ्यता और संस्कृति का जीवंत स्वरूप देखने को मिला. पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी जीवनशैली, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया. पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया.

सांसद जोबा माझी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आदिवासी समाज के लोगों से एकजुट रहने तथा अपनी सभ्यता, संस्कृति, भाषा और परंपराओं को बचाए रखने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा.

वहीं झामुमो नेता एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर केपी सोरेन ने आदिवासी समाज के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि आदिवासियों का इतिहास संघर्ष और त्याग से भरा हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया.

केपी सोरेन ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई संदेश नहीं आना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को वनवासी कहकर उनकी पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष करना होगा और जरूरत पड़ने पर अधिकार लड़कर हासिल करना होगा. उन्होंने हर घर तिरंगा अभियान को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारे दिल में बसता है और उसके लिए अलग से प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है. विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी महापुरुषों और शहीदों को याद करना अधिक महत्वपूर्ण है.

देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं. झारखंड में 32 जनजातीय समुदाय रहते हैं और पूरी दुनिया में आदिवासी आबादी करोड़ों में है. उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री द्वारा दो दिनों तक आदिवासी महोत्सव आयोजित करने का संकल्प लिया जाना आदिवासी संस्कृति और समाज के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समुदाय के बच्चों को सम्मानित किया गया. पूरे कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, इतिहास, अधिकार और एकजुटता का संदेश प्रमुखता से देखने को मिला.

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