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पाकुड़/डेस्क: पाकुड़ के प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने हत्या और जानलेवा हमले के मामले में दोषी सोबेन मरांडी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने पुलिस अनुसंधान में गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए फैसले की प्रति मुख्य सचिव, डीजीपी और पाकुड़ एसपी को भेजने का निर्देश दिया है.
मामले में अभियोजन की ओर से महज पांच गवाह पेश किए गए. जांच अधिकारी कैला उरांव द्वारा जब्ती सूची, हत्या में प्रयुक्त हथियार, खून से सने कपड़े और इंजरी रिपोर्ट को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई. इसके बावजूद लोक अभियोजक लुकास कुमार हेमरम की प्रभावी दलीलों और अदालत के हस्तक्षेप से अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में सफल रहा.
अदालत ने मृतक की पत्नी, जो घटना में खुद भी घायल हुई थी, की गवाही को विश्वसनीय माना. न्यायालय ने स्वयं उससे कई सवाल पूछकर घटना और उसके घायल होने से संबंधित तथ्यों की पुष्टि की. इसी चश्मदीद गवाही को दोषसिद्धि का अहम आधार माना गया.
अदालत ने धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना, धारा 307 में आजीवन सश्रम कारावास व 50 हजार रुपये, धारा 326 में सात वर्ष सश्रम कारावास व 25 हजार रुपये तथा धारा 452 में पांच वर्ष सश्रम कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
अदालत ने कुल दो लाख रुपये के जुर्माने की राशि मृतक की पत्नी को मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है. साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार को पीड़िता को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत अतिरिक्त मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
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