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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य पुलिस की ओर से दायर एक अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच का आदेश के बरकरार रखा। मामला एक सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) के खिलाफ की गई विभागीय कार्यवाही से जुड़ा है. जिस पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने माना की सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन और पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण है.
झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस केस की सुनवाई की. खंडपीठ ने तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार सिंह पर लगाए गए अनुशासनात्मक दंड को रद्द करने के एकल खंडपीठ के आदेश को बरकरार रखा है. उमेश कुमार सिंह 1989 में सीधे तौर पर सब-इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में शामिल हुए थे. लेकिन वर्ष 2010 में चाईबासा के मुफस्सिल थाने के थाना प्रभारी के रूप में तैनाती के दौरान जब्त ट्रकों को छोड़ने के एवज में रिश्वत लेने का उन पर आरोप लगा था. इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई. उनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी थी और निलंबन अवधि के दौरान निर्वाह भत्ते के अलावा बाकी वेतन भी रोका गया. उनकी अपील पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 2024 में उनकी इस सजा को रद्द कर दिया. इस फैसले को राज्य सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी थी.
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