108 एंबुलेंस

पलामू: रेफर के बाद नहीं मिली 108 एंबुलेंस, अस्पताल में ही युवक ने तोड़ा दम

युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद 108 एंबुलेंस सेवा पर भी गंभीर सवाल उठे हैं.

By : News11 Bharat
पलामू: रेफर के बाद नहीं मिली 108 एंबुलेंस, अस्पताल में ही युवक ने तोड़ा दम

न्यूज़11 भारत 
पलामू
/डेस्क: हुसैनाबाद अनुमंडल के देवरी ओपी क्षेत्र में कल मंगलवार देर शाम एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. घटना के बाद 108 एंबुलेंस सेवा पर भी गंभीर सवाल उठे हैं. ससुराल पक्ष के लोगों का आरोप है कि अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद से रेफर किए जाने के बाद 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन कॉल रिसीव होने के बावजूद काफी देर तक होल्ड पर रखा गया और एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. इसी दौरान युवक ने अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद में ही दम तोड़ दिया. 

जानकारी के अनुसार, देवरी ओपी पुलिस को सूचना मिली थी कि देवरी कला सड़क पर एक व्यक्ति शराब के नशे में पड़ा है. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ में उसकी पहचान हैदरनगर थाना क्षेत्र के चेचेरिया गांव निवासी 25 वर्षीय रंजीत कुमार, जो देवरी कला गांव निवासी लक्ष्मण राम का दामाद था. इसके बाद पुलिस ने ससुराल पक्ष के लोगों को बुलाकर युवक को इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद पहुंचाया. 

अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए मेदिनीनगर सदर अस्पताल रेफर कर दिया. इसी बीच साथ आए लोगों ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन उनका आरोप है कि कॉल रिसीव होने के बाद भी उन्हें 10 से 15 मिनट तक होल्ड पर रखा गया जिसके बाद फोन कट गया और तत्काल एंबुलेंस भी नहीं मिली. एंबुलेंस का इंतजार करते-करते युवक की अस्पताल में ही मौत हो गई. 

अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद में दो एंबुलेंस है जिसमें एक एंबुलेंस श्रावणी मेले को लेकर देवघर ड्यूटी पर चला गया है, जबकि दूसरा एंबुलेंस 108 एंबुलेंस सेवा सही नहीं रहने के वजह से लगातार हुसैनाबाद से मेदिनीनगर भेजी जा रही है. युवक जब रेफर हुआ था तब अस्पताल का दूसरा एंबुलेंस दूसरे रेफर मरीज को लेकर गई हुई थी, जिसके चलते मृतक युवक को भेजने के लिये 108 ही सहारा था, जो कि नहीं मिल सका. 

ससुराल पक्ष का कहना है कि दो युवक बाइक से रंजीत कुमार को नशे की हालत में सड़क किनारे उतारकर चले गए थे, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई. वहीं मृतक के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया है. इधर, बुधवार को पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है.

इसे भी पढ़ें: हेरहंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई! अवैध कोयला लदे तीन ट्रक जब्त, तीनों चालकों को भेजा गया जेल

संबंधित सामग्री

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

रामगढ़ में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ा, हाईकोर्ट ने 3,740 से बढ़ाकर 99,300 रुपये प्रति डिसमिल किया

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गांदके गांव में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है.

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

अभिलाष साहू के निलंबन मुक्ति के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट, निलंबन मुक्त होल्ड करने का निर्देश

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त किए जाने के निर्णय से झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू असंतुष्ट हैं.

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

CCL में अनुकंपा नियुक्ति पर झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, NCWA-XI के तहत अविवाहित बहन को भी मिलेगी नौकरी

झारखंड हाई कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है.

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

बिना कारण बताओ नोटिस कर्मचारी की बर्खास्तगी गैर-कानूनी, कोर्ट जाने पर सजा देने की प्रथा तुरंत बंद हो: हाई कोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में लंबे समय तक संविदा पर काम करने वाले नौ कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है.

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

पुरानी सूची में नाम से नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट ने 35 सुपरवाइजरों की मांग ठुकराई

झारखंड हाईकोर्ट ने गैर-औपचारिक शिक्षा योजना में काम कर चुके 35 सुपरवाइजरों को झारखंड सरकार की नियमित सेवा में शामिल करने की मांग खारिज कर दी है.