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रांची/डेस्कः हर साल धार्मिक जुलूस के दिन रांची में 7 से 8 घंटे का पावर कट होता है और सारा शहर अंधेरे में डूब जाता है. 2016 में तत्कालीन रघुवर सरकार ने रांची में APDRP के तहत अंडरग्राउंड पावर केबलिंग का काम शुरू कराया था. उसका क्या हुआ ? इसका जवाब ऊर्जा विभाग के पास नहीं है. पढ़ें एक रिपोर्ट.
सरहुल जुलूस के समय रांची के महात्मा गांधी रोड पर कई घंटे तक अंधेरा छाया रहा. दिन के 1:00 से लेकर रात के 11:30 बजे तक रांची अंधेरे में डूबी रही. गर्मी के समय लंबे पावर कट से ज्यादातर इनवर्टर फेल हो गए. छोटे-छोटे बच्चे बुजुर्ग और बीमार लोग परेशन रहे हैं. एक बार फिर 6 अप्रैल को रामनवमी जुलूस के समय भी यही होने वाला है. मोहर्रम हो या सरहुल का जुलूस, साल में चार बार ऐसा होना आम बात है. लोग परेशान हैं, चिंतित हैं.
2016 में तत्कालीन रघुवर सरकार ने रांची में एक्सीलरेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम के तहत रांची की बिजली व्यवस्था को अंडरग्राउंड करने के लिए करीब 44000 करोड़ का बजट पास किया काम भी शुरू हुआ. पॉलीकैब और लीला नाम की एजेंसी कोई यह काम दिया गया था. उस योजना का क्या हुआ, इसका जवाब जेवीवीएनएल के पास नहीं है. कई बार संपर्क करने के बावजूद GM ने कोई रिस्पांस नहीं दिया. झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज नाम मुख्यमंत्री से यह मांग की है कि स्थिति साफ की जाए कि आखिर कब रांची में अंडरग्राउंड केबलिंग की यह योजना पूरी होगी.
झारखंड के ही जमशेदपुर में प्रोसेशन के समय बिजली नहीं काटी जाती. आसपास के किसी भी राज्य की राजधानी में किसी भी धार्मिक जुलूस के समय बिजली नहीं काटी जाती. आखिर कब मिलेगी लोगों को इस परेशानी से निजात रांची की जनता को अपने जनप्रतिनिधियों से भी जवाब चाहिए. ना ही कोई इस मामले में याचिका दायर करता है और ना ही सदन में ही कोई सवाल उठा.