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रांची/डेस्क: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन मां दुर्गा के छठवें स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी ऋषि कात्यायन की तपस्या के फलस्वरूप प्रकट हुई थी, इसलिए उन्हें यह नाम मिला. इन्हें शक्ति और विजय की देवी माना जाता है, जो भक्तों को बल, बुद्धि और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं.
मां कात्यायनी का वाहन सिंह है और वे चार भुजाओं वाली देवी हैं. उनके एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल, तीसरा और चौथा हाथ वरद और अभय मुद्रा में होते हैं. ऐसा माना जाता है कि मां कात्यायनी की कृपा से भक्तों को उनके मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती हैं. विशेष रूप से, जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो या प्रेम विवाह में कोई बाधा आ रही हो, वे माता की पूजा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
शुभ मुहूर्त और पूजन का सही समय
चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त आज प्रात: 7:02 बजे से प्रारंभ होकर पूरे दिन रहेगा. यदि आप ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना चाहते है तो यह समय सुबह 4:37 बजे से 5:23 बजे तक रहेगा. इस दौरान माता की उपासना से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा.
मां कात्यायनी का प्रिय भोग
मां कात्यायनी को शहद अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन उन्हें शहद का भोग लगाना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता हैं. इससे न केवल सभी मनोकामनाएं पूरी होती है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती हैं.
मां कात्यायनी की पूजा विधि
- प्रात: स्नान कर पीले या लाल वस्त्र धारण करें.
- मां कात्यायनी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं.
- माता को पीले फूल और पीले रंग का नैवेद्य अर्पित करें.
- मां को शहद का भोग लगाएं, यह विशेष रूप से शुभ माना जाता हैं.
- मंत्र का जाप करें.
मां कात्यायनी के मंत्र
1. कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
2.ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
3. प्रार्थना मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
4. स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
5. ध्यान मंत्र
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥
मां कात्यायनी की आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।