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रांची/डेस्क: सऊदी अरब ने एक अनोखा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अब ऊंटों के लिए पासपोर्ट जारी करने की घोषणा की हैं. यह पहल देश की “सऊदी विजन 2030” योजना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य ऊंटों से जुड़े पूरे सेक्टर को संगठित करना और उसे आधुनिक बनाना हैं.
सऊदी अरब के उप पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री मनसूर अलमुशैती ने मंगलवार को इस प्रणाली की औपचारिक घोषणा की. उन्होंने बताया कि 'कैमल पासपोर्ट' से अब हर ऊंट की पहचान, स्वास्थ्य रिकॉर्ड और मालिकाना हक को साफ और भरोसेमंद तरीके से दर्ज किया जा सकेगा.
मंत्री ने कहा, “इस पासपोर्ट के जरिए ऊंटों की देखभाल और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा. इसके अलावा, ऊंटों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा." सऊदी अरब के कृषि मंत्रालय ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर इस पासपोर्ट की तस्वीर साझा की हैं. इसमें हरे रंग का पासपोर्ट, देश का चिन्ह और ऊंट की सोने जैसी आकृति दिखाई दे रही हैं.
معالي نائب الوزير يدشّن جواز سفر الإبل، بهدف رفع كفاءة الإنتاجية في القطاع، وبناء قاعدة مرجعية للإبل. pic.twitter.com/iC1Qeq1bUs
— وزارة البيئة والمياه والزراعة (@MEWA_KSA) February 3, 2026
मंत्रालय के अनुसार, प्रत्येक पासपोर्ट में शामिल होंगे:
ऊंट का माइक्रोचिप नंबर और पासपोर्ट नंबर
- ऊंट का नाम, जन्मतिथि, नस्ल, रंग, लिंग और जन्मस्थान
- मालिक और जारी करने वाली प्राधिकरण की जानकारी
- ऊंट की दाईं और बाईं ओर से तस्वीरें
- टीकाकरण रिकॉर्ड और वैक्सीनेशन की पूरी जानकारी
इस प्रणाली से ऊंट की स्वास्थ्य निगरानी आसान होगी और किसी भी संक्रामक बीमारी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव होगी.
क्यों जरूरी है ऊंट पासपोर्ट?
अरब देशों में ऊंट केवल जानवर नहीं, बल्कि परिवहन, खेल और सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा हैं. सऊदी अरब में ऊंटों को पालने और लेन-देन करने की परंपरा हैं. अब पासपोर्ट के जरिए प्रत्येक ऊंट की वैध और आधिकारिक पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी. मंत्री अलमुशैती ने बताया कि इस सिस्टम से ऊंटों का डेटाबेस तैयार होगा, मालिकाना हक को साबित करना आसान होगा, और पशुधन प्रबंधन व निगरानी मजबूत होगी. इससे ऊंट उद्योग अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनेगा.
अंदाजा है कि 2024 में सऊदी अरब में करीब 2.2 मिलियन ऊंट हैं. धीरे-धीरे सभी ऊंटों को इस सिस्टम में शामिल किया जाएगा. ऊंट पासपोर्ट से न केवल बाजार में नियम स्पष्ट होंगे, बल्कि यह ऊंट उद्योग को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से मजबूत और भरोसेमंद बनाने में भी मदद करेगा. यह कदम सऊदी अरब में पशुपालन और ऊंट संस्कृति को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा हैं.
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