न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: झारखंड के उन तमाम लोगों के लिए खुशखबरी जो अपने सपनों का आशियाना ढूंढ रहे हैं. अगर आपने किसी भी बिल्डर से अपने फ्लैट के लिए एग्रीमेंट कराया है तो, यह देख लीजिए कि आपका बिल्डर और उसका प्रोजेक्ट झरेरा के अंतर्गत सूचीबद्ध है कि नहीं. वैसे झारखंड के अंदर आठ फ्लैट से ऊपर और 800 स्क्वायर मीटर से ऊपर के तमाम बिल्डिंग प्रोजेक्ट या कमर्शियल बिल्डिंग प्रोजेक्ट, झरेरा के अंतर्गत सूचीबद्ध और रजिस्टर्ड होने की प्रतिबद्धता है. झरेरा के अध्यक्ष वीरेंद्र भूषण ने न्यूज़ 11 को बताया कि झरेरा झारखंड के बिल्डरों को नियम कायदे कानून पर अपना कारोबार करने के लिए कई बार समझा चुका है, कई कार्यालय आयोजित की जा चुकी हैं.
26 मार्च को रांची के रेडिएशन ब्लू में भी एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें राज्य के तमाम सूचीबद्ध बिल्डर और ग्राहक दोनों बुलाए जाएंगे. झरेरा ने नियम बनाया है कि किसी भी बिल्डर को यह बताना पड़ेगा कि उसका प्रोजेक्ट कब पूरा हो जाएगा. इसकी डेडलाइन कब है. साथ ही उसे क्वार्टरली अपडेशन रिपोर्ट भी झरेरा को लिखित रूप में सूचित करना पड़ेगा, जिससे यह पता चलेगा कि बिल्डर का प्रोजेक्ट उसके दावे के अनुसार कितना पूरा हुआ है. इस रिपोर्ट के अनुसार बिल्डर ग्राहकों से पैसे लेगा. अगर डेडलाइन के अनुसार प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं हुआ तो झरेरा को शिकायत की जा सकती है और झरेरा मामले की सुनवाई करेगा. भौतिक निरीक्षण भी किया जाएगा. दोषी पाए जाने पर बिल्डर को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा. बिल्डर फिर देश में कहीं भी इस कंपनी के नाम से अपना कारोबार नहीं कर पाएगा.
झरेरा का गठन 2017 में हुआ है. 2018 से सक्रिय रूप से झरेरा कार्यरत है. अब तक 500 के आसपास मामले निपटाए गए हैं. झरेरा के अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने कई बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई भी की है. मिसाल के तौर पर रांची कांटा टोली स्थित प्रोजेक्ट रीबलोंन इम्प्लेक्स ने ग्राहकों के साथ धोखा किया. तय समय सीमा के अंदर अपना प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया, काम को अधूरा छोड़ दिया. लिहाजा सुनवाई के बाद इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. झारखंड में ज्यादा शिकायत यही होती है कि बिल्डर ने अपना काम समय पर पूरा नहीं किया या दो पार्टनरों में विवाद के बाद प्रोजेक्ट अधूरा रह गया. ऐसी स्थिति में झरेरा मामले की सुनवाई करता है और 70% से ऊपर जो प्रोजेक्ट का काम पूरा हो गया ,है अगर कोई ग्राहक उसे प्रोजेक्ट में खुद से बाकी काम पूरा करने में इच्छुक है तो झरेड़ा ने ऐसे कई लोगों की रजिस्ट्री भी करवाई है.
देखने में यही आता है कि अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन छपते हैं. प्रोजेक्ट के बारे में यह कहा जाता है कि यह सीएनटी फ्री है. इसमें 40 फीट की रोड होगी, व्यायाम शाला होगा, स्विमिंग पूल होगा, शॉपिंग मार्केट होगा. लेकिन बनाते-बनाते प्रोजेक्ट डिले हो जाता है. पैसे भी ले लिए जाते हैं, मगर प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया जाता है. रांची में ऐसे सैकड़ो प्रोजेक्ट है, जिसमें बिल्डर ने पार्किंग एरिया बनाया नहीं, अगर बनाया तो उस पर आधा दुकान बना दी. लिफ्ट नहीं बनाया लेकिन पैसा पूरा ले लिया या फिर आधा पैसा लेकर ही काम छोड़ दिया. इन तमाम मामलों में झरेड़ा ने स्पष्ट रूप से एक्शन दिखाया है और 500 के आसपास विवाद निपटा दिए गए हैं. 155 मामले अभी भी हियरिंग की प्रक्रिया में है. अगर आप भी ऐसे किसी बिल्डर की वादा खिलाफी का शिकार है, तो देर मत कीजिए नगर निगम के सातवे तल्ले पर झरेरा का ऑफिस है. वहां जाकर आप लिखित शिकायत भी कर सकते हैं और झरेरा की वेबसाइट पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.