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रांची/डेस्क: झारखंड हाई कोर्ट ने धनबाद के सरायढेला में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और एक रैयत के बीच चल रहे जमीन विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने धनबाद के जिला जज के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता को सीधे तौर पर अतिक्रमणकारी मान लिया गया था. न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया और मामले को नए सिरे से फैसले के लिए वापस धनबाद कोर्ट भेज दिया है.
क्या है पूरा विवाद?
धनबाद के सरायढेला निवासी तपेश्वर सिंह ने साल 2004 में बीसीसीएल एम्प्लॉइज हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी से 11 डिसमिल जमीन खरीदी थी. इसके बाद उन्होंने बकायदा सरकारी रसीद कटवाई (म्यूटेशन कराया) और म्यूनिसिपल अथॉरिटी (MADA) से नक्शा पास कराकर मकान का निर्माण शुरू किया. तभी अचानक बीसीसीएल (BCCL) ने उन्हें नोटिस थमा दिया कि उन्होंने बीसीसीएल की अधिग्रहीत जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है. बीसीसीएल के एस्टेट ऑफिसर ने साल 2017 में तपेश्वर सिंह के खिलाफ बेदखली का आदेश पास कर दिया. इसके खिलाफ जब वे धनबाद जिला अदालत गए, तो वहां भी साल 2023 में उनकी अपील खारिज हो गई. थक-हारकर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
हाई कोर्ट ने धनबाद कोर्ट के फैसले में पकड़ी बड़ी भूल
हाई कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद पाया कि धनबाद जिला कोर्ट ने अपने फैसले में एक गंभीर और साफ दिखने वाली गलती की थी.
धनबाद जिला जज ने अपने आदेश में सीधे लिख दिया था कि याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में कोई दस्तावेज पेश नहीं किए. जबकि रिकॉर्ड से साफ है कि उन्होंने सेल डीड, दाखिल-खारिज की रसीद, रेंट रसीद और माडा का स्वीकृत नक्शा जमा किया था, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह अनदेखा कर दिया.
प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने कोर्ट को बताया कि कुल प्लॉट 44 डिसमिल का है, जिसमें बीसीसीएल ने सिर्फ 11 डिसमिल का अधिग्रहण किया था. प्रार्थी ने जब एस्टेट ऑफिसर से गुहार लगाई कि किसी सरकारी अमीन (Surveyor) से जमीन की सही नापी करा ली जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके, तो बीसीसीएल ने नापी कराने से ही इनकार कर दिया था.
हाई कोर्ट का अंतिम आदेश: अब आगे क्या होगा?
न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने धनबाद जिला अदालत के फैसले को खारिज करते हुए Civil Misc. Appeal No. 37/2017 को दोबारा बहाल कर दिया है.
हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए तपेश्वर सिंह और बीसीसीएल (BCCL) दोनों को निर्देश दिया है कि वे 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे धनबाद जिला जज की अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों.
हाई कोर्ट ने धनबाद कोर्ट को खुली छूट दी है कि यदि मामले को सही तरीके से समझना है, तो वे राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी/अमीन को भेजकर दोनों पक्षों की मौजूदगी में विवादित जमीन की सरकारी नापी (Measurement) करवाएं और प्रार्थी के दस्तावेजों को देखकर नए सिरे से न्यायसंगत फैसला सुनाएं.