मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: खलारी प्रखंड अंतर्गत खलारी पंचायत के बलथरवा गांव सहित आसपास के कई गांवों में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से वितरित किए गए मधुमक्खी पालन के बॉक्स आज उपयोग के अभाव में कबाड़ में तब्दील होते नजर आ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर योजना तो शुरू कर दी गई, लेकिन उसके बाद न तो संबंधित विभाग ने इसकी निगरानी की और न ही लाभुकों को उचित प्रशिक्षण व मार्गदर्शन दिया गया.
जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021–22 में डीएमएफटी (जिला खनिज प्रतिष्ठान ट्रस्ट) मद से महिला स्वयं सहायता समूहों को मधुमक्खी पालन के लिए पेटियां (बॉक्स) वितरित की गई थीं. इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें मधुमक्खी पालन के माध्यम से शहद उत्पादन कर आय का साधन उपलब्ध कराना था. योजना के तहत उम्मीद की जा रही थी कि गांव की महिलाएं इस कार्य से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त होंगी और परिवार की आय में सहयोग कर सकेंगी.
योजना की जमीनी हकीकत उलट
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है. बलथरवा गांव में एक भवन के अंदर बड़ी संख्या में मधुमक्खी पालन के बॉक्स लंबे समय से पड़े हुए हैं, जिनका उपयोग नहीं होने के कारण वे धीरे-धीरे खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने के बाद अधिकारियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे यह महत्वाकांक्षी योजना ठंडे बस्ते में चली गई.
योजना का प्रचार हुआ, लेकिन जमीन पर नहीं हुआ काम
ग्रामीणों का कहना है कि बॉक्स वितरण के समय गांव में काफी प्रचार-प्रसार किया गया था और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी-बड़ी बातें कही गई थीं. लेकिन उसके बाद न तो नियमित प्रशिक्षण दिया गया और न ही मधुमक्खी पालन की तकनीक या शहद विपणन की कोई व्यवस्था की गई.
ग्रामीणों ने कहा कि यदि संबंधित विभाग और अधिकारी समय-समय पर इसकी निगरानी करते और महिलाओं को प्रशिक्षण देकर प्रोत्साहित करते, तो आज यह योजना गांव में रोजगार का एक मजबूत साधन बन सकती थी.
लाखों खर्च, लेकिन लाभ शून्य
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर योजना चलाई गई, लेकिन आज तक इसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. बॉक्स एक जगह पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं और लाभुक महिलाएं आज भी रोजगार के लिए दूसरे विकल्प तलाशने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि योजना के क्रियान्वयन के बाद उसकी निगरानी नहीं की जाएगी, तो इस तरह की योजनाओं पर खर्च होने वाले सरकारी पैसे का आखिर क्या लाभ है.
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि योजना शुरू होने के बाद इसे आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभाग की भूमिका की भी समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रह जाएं.
इधर इस संबंध में खलारी के अंचलाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रणव कुमार अम्बष्ट ने कहा कि यह मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है. उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन महिलाओं को स्वावलंबी बनाने वाली महत्वपूर्ण योजना है. यदि कहीं बॉक्स उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं, तो इसकी जानकारी लेकर जांच की जाएगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस योजना को फिर से सक्रिय किया जाए और महिलाओं को सही प्रशिक्षण व सहयोग मिले, तो अभी भी यह योजना गांव में रोजगार और आय का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है.
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