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पलामू/डेस्क: यह कहानी है एक ऐसे अधिकारी की, जिसने बंदूक के बल पर नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और इंसानियत के दम पर पलामू के इतिहास को बदला हैं. पलामू की पहली महिला एसपी ने साबित किया है कि शांति बंदूक के दम पर नहीं, बल्कि कुशल रणनीति और मानवता के दम पर लाई जा सकती हैं.
झारखंड 15 नवंबर को अपनी रजत जयंती (25 वर्ष) मनाने जा रहा है और इस बदलाव की कहानी पलामू जिले के एक साहसिक अध्याय से लिखी जा रही हैं. इस अध्याय की नायिका हैं. 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी रीष्मा रमेशन, जो पलामू की बागडोर संभाल रही है. उनके नेतृत्व में पलामू ने वह कर दिखाया जो पिछले तीन दशकों में नहीं हुआ था. साल 1990 के बाद पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव नक्सल हिंसा से पूरी तरह मुक्त संपन्न हुए. यह उपलब्धि पलामू की पहली महिला एसपी के कुशल प्रबंधन और जीरो-टॉलरेंस नीति का परिणाम है, जिसके लिए राज्यपाल और चुनाव आयोग ने उन्हें सम्मानित कर, इस असाधारण पुलिसिंग पर मुहर लगाई हैं.
सीआरपीएफ की 'छतरी' हटी, फिर भी शांति बरकरार
एसपी रीष्मा रमेशन ने 2023 में पलामू में पदभार संभाला और जल्द ही उन्हें एक बड़ी चुनौती मिली: पलामू से सीआरपीएफ की पूरी बटालियन को हटा दिया गया. वर्ष 2000 से, नक्सल अभियान और चुनावी सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के पास था लेकिन 2024 के चुनावों में, एसपी रमेशन ने अपनी विशेष रणनीति लागू की, जिसने नक्सली संगठनों को हिंसा करने या अपने मंसूबों में कामयाब होने का कोई मौका नहीं दिया.
हेलीकॉप्टर की जगह 'जमीन पर' सुरक्षाबल
नक्सल खौफ के कारण पलामू के कई हिस्सों में पोलिंग पार्टियों को पहले हेलीकॉप्टर से भेजा जाता था लेकिन रीष्मा रमेशन के कार्यकाल में, चक और महुडंड जैसे सबसे संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में पहली बार पोलिंग पार्टियाँ सड़क मार्ग से पैदल पहुंची. उन्होंने नक्सल हमले के खतरे वाली 30 महत्वपूर्ण सड़कों के लिए विशेष सुरक्षा योजना बनाई, जिसके कारण चुनाव के दौरान सुरक्षा बल और पोलिंग पार्टियाँ निर्भीक होकर गुजरी. बिहार के गया और औरंगाबाद जैसे इंटर-स्टेट बॉर्डर का फायदा उठाने की नक्सलियों की हर कोशिश को पलामू एसपी की टीम ने नाकाम कर दिया, जबकि पूर्व में इन सीमाओं से घुसपैठ कर कई जवान शहीद हो चुके थे.
अपराधियों और नक्सलियों के लिए 'यमराज'
आईपीएस रीष्मा रमेशन का खौफ अपराधियों और नक्सलियों के बीच इस कदर है कि उनके कार्यकाल में ₹5 लाख का इनामी टीएसपीसी कमांडर मुखदेव यादव और टॉप कमांडर तुलसी भुइयां मारे गए, जबकि कुख्यात डॉन गौतम कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने मजबूरी में आत्मसमर्पण किया. उनके पदभार संभालने के कुछ ही समय बाद उन्होंने डॉन सुजीत सिन्हा के हथियारों के जखीरे (8 पिस्टल) को बरामद कर तस्कर को गिरफ्तार किया. यह उनके नेतृत्व का ही परिणाम है कि 2024-2025 में अब तक 892 अपराधी गिरफ्तार हुए है और 83 से अधिक अवैध हथियार बरामद किए गए हैं.
कड़क वर्दी के पीछे भावुक और आध्यात्मिक चेहरा
अपराधियों के लिए सख्त होने के बावजूद, एसपी रीष्मा रमेशन का एक दयालु और सामाजिक पक्ष भी है. वह एक आध्यात्मिक महिला अधिकारी है, जो अहले सुबह पूजा-अर्चना के बाद अपना काम शुरू करती है. उनकी सादगी उन्हें आम जनता से जोड़ती है. उन्होंने मनातू और सदर थाना क्षेत्र की जरूरतमंद लड़कियों के जीवन को संवारा है एक को चक हाई स्कूल में एडमिशन करवाकर 12वीं में अच्छे अंक दिलवाए, तो दूसरी गरीब लड़की को पीजी में नामांकन करवाकर प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग भी करवा रही है. उनका यह अपनत्व पुलिसकर्मियों में भी ममत्व का भाव पैदा करता है.
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